इंदौर: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक शादी जबरदस्त चर्चा में है, जिसकी वजह सुनकर हर कोई हैरान है। बताया जा रहा है कि इस शादी में सिर्फ आतिशबाजी पर ही करीब 70 लाख रुपये खर्च किए गए, जबकि इतने बजट में तो आम तौर पर पूरी शादी निपट जाती है। मामला मध्यप्रदेश के इंदौर का है, जहां बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला के बेटे अंजनेश शुक्ला की शादी इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई है।
इंदौर विधानसभा-3 से बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला के बेटे अंजनेश शुक्ला की शादी 11 दिसंबर को सिमरन के साथ संपन्न हुई। शादी के भव्य आयोजन के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं, जिनमें शानदार और लंबी आतिशबाजी लोगों का ध्यान खींच रही है। यूजर्स का कहना है कि यह आतिशबाजी किसी बड़े राष्ट्रीय उत्सव से कम नहीं थी।
हालांकि, शादी सिर्फ भव्यता के कारण ही नहीं बल्कि एक और गंभीर वजह से विवादों में आ गई। दरअसल, शादी के अगले दिन यानी 12 दिसंबर को नवविवाहित जोड़ा इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर पहुंचा। यहां दोनों ने मंदिर के गर्भगृह के अंदर एक-दूसरे को वरमाला पहनाई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इस वीडियो के सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया, क्योंकि कोरोना काल के बाद से खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किस अनुमति से विधायक के बेटे को यह विशेष छूट दी गई।
इतना ही नहीं, आरोप है कि इससे पहले भी अंजनेश शुक्ला उज्जैन के महाकाल मंदिर और देवास के टेकरी माता मंदिर में भी प्रोटोकॉल तोड़ चुके हैं। अब खजराना गणेश मंदिर का यह मामला सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सोशल मीडिया पर एक ओर जहां मंदिर के अंदर की वरमाला का वीडियो वायरल है, वहीं दूसरी ओर शादी की भव्य आतिशबाजी के वीडियो भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। कई यूजर्स ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि शादी में प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की भी अनदेखी की गई, जबकि सरकार खुद लोगों से पर्यावरण संरक्षण की अपील करती है।
विवाद बढ़ने के बावजूद अब तक बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला या उनके परिवार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं खजराना गणेश मंदिर प्रशासन भी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है।
फिलहाल, 70 लाख की आतिशबाजी और मंदिर प्रोटोकॉल उल्लंघन के इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया पर लोग बराबरी के नियमों और वीआईपी संस्कृति को लेकर तीखे सवाल उठा रहे हैं। अब देखना होगा कि इस मामले में प्रशासन कोई कार्रवाई करता है या फिर मामला सिर्फ सोशल मीडिया की बहस बनकर रह जाता है।














