Ram Sutar Passes Away: भारत की मूर्तिकला को वैश्विक पहचान दिलाने वाले महान शिल्पकार राम सुतार का बुधवार, 17 दिसंबर की देर रात निधन हो गया। 100 वर्ष की उम्र में उन्होंने उम्र से जुड़ी बीमारियों से संघर्ष करते हुए अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
राम सुतार के निधन की पुष्टि उनके पुत्र अनिल सुतार ने की। उन्होंने बताया कि पिता का अंतिम संस्कार आज पूरे राजकीय सम्मान और पारिवारिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा। लंबे और रचनात्मक जीवन में राम सुतार ने जिस तरह भारतीय इतिहास को पत्थर और धातु में ढाला, वह हमेशा याद रखा जाएगा।
पत्थर को जीवंत कर देने वाले कलाकार
कहा जाता था कि राम सुतार जिस पत्थर को छू लेते थे, वह देखते ही देखते अद्भुत कलाकृति में बदल जाता था। उनकी कृतियों में केवल आकार नहीं, बल्कि इतिहास, भावनाएं और राष्ट्रभक्ति झलकती थी। उन्होंने अपने शिल्प के जरिए देश के महान नेताओं और विभूतियों को अमर कर दिया।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से रचा इतिहास
राम सुतार का नाम दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ से हमेशा जुड़ा रहेगा। गुजरात में स्थापित सरदार वल्लभ भाई पटेल की यह विशाल प्रतिमा न सिर्फ भारत की एकता का प्रतीक बनी, बल्कि दुनिया भर में भारतीय कला और इंजीनियरिंग की क्षमता का उदाहरण भी पेश किया। इस प्रतिमा के निर्माण के साथ ही राम सुतार के नाम एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज हो गया।
सम्मान और उपलब्धियां
अपनी असाधारण कला और योगदान के लिए राम सुतार को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। 1999 में उन्हें पद्म श्री, 2016 में पद्म भूषण और हाल ही में महाराष्ट्र सरकार द्वारा महाराष्ट्र भूषण जैसे सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया। ये पुरस्कार उनके लंबे और समर्पित कला-सफर की गवाही देते हैं।
विरासत हमेशा जीवित रहेगी
राम सुतार भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी बनाई प्रतिमाएं आने वाली पीढ़ियों को इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का संदेश देती रहेंगी। भारतीय मूर्तिकला के इस युगपुरुष का जाना एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं।
देश उन्हें एक महान कलाकार और सच्चे राष्ट्रशिल्पी के रूप में हमेशा याद रखेगा।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम सुतार का निधन, 100 साल की उम्र में ली अंतिम सांस












