रांची: झारखंड में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम यानी पेसा नियमावली को अब तक लागू नहीं किए जाने पर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाया है। आदिवासी बुद्धिजीवी मंच द्वारा दायर अवमानना याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर कड़ी नाराजगी जताई।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई। इस दौरान पंचायती राज विभाग के सचिव स्वयं कोर्ट में उपस्थित रहे।
कैबिनेट में पेश हुई या नहीं? कोर्ट ने किया सीधा सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पंचायती राज विभाग के सचिव से स्पष्ट रूप से पूछा कि पेसा कानून से संबंधित नियमावली को कैबिनेट में पेश किया गया है या नहीं। इस पर सचिव संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके और जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की।
कोर्ट ने सचिव के आग्रह को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को पांच दिनों के भीतर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि सरकार यह बताए कि पेसा नियमावली को कब तक लागू किया जाएगा।
23 दिसंबर तक जवाब अनिवार्य, नहीं तो सख्त कार्रवाई
हाईकोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि 23 दिसंबर तक यदि नियमावली लागू करने की ठोस समयसीमा नहीं बताई गई, तो कोर्ट कड़ा रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।
इसके साथ ही अदालत ने राज्यभर में बालू घाटों और लघु खनिजों के आवंटन पर लगी रोक को हटाने से फिलहाल इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक पेसा नियमावली लागू नहीं होती, तब तक इस प्रतिबंध को हटाने पर विचार नहीं किया जा सकता।
पहले ही तैयार हो चुका है ड्राफ्ट
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि पंचायती राज विभाग पेसा नियमावली का प्रारूप तैयार कर चुका है। पहले इस ड्राफ्ट को कैबिनेट को-ऑर्डिनेशन कमेटी को भेजा गया था, जहां से कुछ आपत्तियां सामने आईं।
आपत्तियों के बाद नियमावली के प्रारूप में संशोधन कर इसे दोबारा ड्राफ्ट कमेटी को भेजा गया है। वहां से अंतिम स्वीकृति के लिए इसे कैबिनेट में पेश किया जाना है।
23 दिसंबर को कैबिनेट बैठक, बढ़ी उम्मीदें
महत्वपूर्ण यह है कि झारखंड कैबिनेट की बैठक 23 दिसंबर को प्रस्तावित है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि उसी दिन पेसा नियमावली के ड्राफ्ट को कैबिनेट के समक्ष रखा जा सकता है और उसे मंजूरी मिल सकती है।
यदि कैबिनेट से पेसा नियमावली को स्वीकृति मिल जाती है, तो हाईकोर्ट द्वारा बालू घाटों एवं लघु खनिजों के आवंटन पर लगाई गई रोक हटने का रास्ता साफ हो जाएगा।
अगली सुनवाई 23 दिसंबर को
हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 23 दिसंबर तय की है। अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम और कैबिनेट के फैसले पर टिकी हैं।
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