तेहरान: ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर एक भयावह और झकझोर देने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जमीनी स्तर पर काम कर रहे डॉक्टरों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, इस लंबे और हिंसक संघर्ष में अब तक कम से कम 16,500 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि 3 लाख 30 हजार से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
आर्थिक बदहाली और महंगाई के विरोध से शुरू हुआ यह आंदोलन अब धीरे-धीरे ईरानी शासन को उखाड़ फेंकने की खुली मांग में तब्दील हो चुका है। सड़कों पर उतर चुके आम नागरिकों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव लगातार और अधिक हिंसक होता जा रहा है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने महीनों बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि देश में चल रही अशांति के दौरान हजारों लोगों की मौत हुई है। हालांकि, उन्होंने शासन की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय इन प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार दिया। खामेनेई ने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर विद्रोह भड़काने का आरोप लगाया और प्रदर्शनकारियों को अमेरिका का पैदल सैनिक बताते हुए उन्हें देशद्रोही कहा।
प्रदर्शनकारियों पर मिलिट्री-ग्रेड हथियारों का इस्तेमाल
ग्राउंड जीरो से सामने आ रही रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सेना और सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर मिलिट्री-ग्रेड हथियारों का प्रयोग कर रहे हैं।
पीड़ितों के सिर, गर्दन और छाती में गोलियों और छर्रों के घाव पाए गए हैं, जो सीधे जान लेने के इरादे की ओर इशारा करते हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हजारों लोगों ने अपनी एक आंख खो दी है। केवल तेहरान स्थित नूर क्लिनिक में ही आंखों की चोट के 7,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जो दमन की भयावहता को उजागर करते हैं।
इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच Starlink बना ‘डिजिटल जीवनरेखा’
प्रदर्शनों की सच्चाई दुनिया से छुपाने के लिए ईरानी सरकार ने देशभर में इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया। ऐसे हालात में एलन मस्क की कंपनी Starlink प्रदर्शनकारियों और डॉक्टरों के लिए जीवनरेखा बनकर सामने आई।
स्पेसएक्स द्वारा ईरान के लोगों के लिए उपग्रह इंटरनेट सेवा मुफ्त उपलब्ध कराए जाने से डॉक्टर, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता जमीनी हालात को दुनिया तक पहुंचाने में सफल हो पा रहे हैं।
हालांकि, ईरानी सरकार Starlink को रोकने के लिए सिग्नल जैमर और स्पूफिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन इसके बावजूद यह सेवा सरकार की डिजिटल सेंसरशिप के खिलाफ एक नई लड़ाई बन चुकी है।
तानाशाही के खिलाफ निर्णायक मोड़ पर ईरान
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात ईरान के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकते हैं। बढ़ती मौतें, अंतरराष्ट्रीय दबाव और जनता का आक्रोश अब ईरानी शासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।














