झारखंड वार्ता संवाददाता
गढ़वा: भाजपा जिला मीडिया प्रभारी रितेश चौबे ने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश में झारखंड पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो चुकी है। गढ़वा जिले में सदर अस्पताल से लेकर प्रखंड और अनुमंडल स्तर तक की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल स्थिति में हैं और पूरा स्वास्थ्य विभाग खुद वेंटिलेटर पर चला गया है।
रितेश चौबे ने आरोप लगाया कि झामुमो सरकार में बैठे मंत्री, विधायक और अधिकारी जनता की समस्याओं से बेखबर होकर सिर्फ अपनी झोली भरने में लगे हैं। अस्पतालों में डॉक्टर, दवा, जांच और एम्बुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं खुद “बीमार” हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि गरीब मरीज अपनी जान बचाने के लिए प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं और कई बार खुद को गिरवी रखने जैसी स्थिति में पहुंच जा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि गढ़वा जिला ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था खाट पर पड़ी हुई सिसक रही है। अनुबंध पर बहाल डॉक्टरों को हेमंत सरकार समय पर वेतन तक नहीं दे पा रही है, जिससे प्रदेश में आपातकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। सदर अस्पताल गढ़वा में इलाज के बजाय रेफर का खेल चल रहा है और कुछ डॉक्टर मरीजों का इलाज करने के बजाय उन्हें बाहर रेफर कर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं, जो मानवता को शर्मशार करने वाला है।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि कई डॉक्टर और पदाधिकारी दबी जुबान से सरकार की नीतियों को कोस रहे हैं, वहीं अधिकारी फंड की कमी का रोना रो रहे हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गढ़वा के ब्लड बैंक में नेट मशीन तक उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण इमरजेंसी में भी रक्त जांच के लिए नमूने रांची भेजने पड़ते हैं। इससे मरीजों की जान पर खतरा बढ़ गया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सिर्फ फंड का हवाला देकर अपनी लाचारी जाहिर कर रहे हैं।
अंत में रितेश चौबे ने कहा कि झामुमो सरकार में जनता त्राहिमाम कर रही है। गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए सरकार कोई ठोस काम नहीं कर रही है और पूरे राज्य में अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है।
भाजपा जिला मीडिया प्रभारी ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल, बोले– झारखंड में आपातकाल जैसे हालात











