रांची: बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा 21 से 23 जनवरी 2026 तक “विदेशी भाषा शिक्षण एवं अधिगम में प्रौद्योगिकी, नैतिकता और सांस्कृतिक आयाम” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन हाइब्रिड मोड में आयोजित होगा, जिसमें देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद भाग लेंगे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तीव्र विकास के साथ भाषा शिक्षण, अधिगम और मूल्यांकन की प्रक्रियाएँ निरंतर पुनर्परिभाषित हो रही हैं। ऐसे परिदृश्य में यह सम्मेलन भाषा शिक्षा को नैतिकता, संस्कृति और मानवीय हस्तक्षेप से जुड़े महत्वपूर्ण विमर्शों के केंद्र में स्थापित करता है।
सम्मेलन में भाषा, प्रौद्योगिकी और संस्कृति के अंतर्संबंधों पर कार्य कर रहे ख्यातिप्राप्त विद्वान आमंत्रित व्याख्यान और शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। प्रमुख वक्ताओं में प्रो. सुषांत कुमार मिश्रा (जेएनयू), प्रो. अविजित बेनर्जी (विश्व-भारती विश्वविद्यालय), डॉ. कुमारी मानसी (एमिटी विश्वविद्यालय, हरियाणा), डॉ. ज्योति शर्मा (बीएचयू), डॉ. मो. अलीउल आज़िम (विश्व-भारती विश्वविद्यालय) तथा रोडिना ओल्गा (मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ साइकोलॉजी) शामिल हैं।
सम्मेलन में प्रो. डी. के. सिंह (फ्रेंच स्टडीज़ विभाग, बीएचयू) तथा जूलिया मार्टिन-लेग्रोस, अटैशे फॉर कोऑपरेशन इन फ्रेंच लैंग्वेज, ईस्ट इंडिया की उपस्थिति से अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहभागिता और अधिक सशक्त होगी।
तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन संस्थान के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना के संरक्षण में किया जा रहा है। सम्मेलन का समग्र अकादमिक नेतृत्व डॉ. भास्कर कर्ण, विभागाध्यक्ष, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा किया जा रहा है। सम्मेलन के संयोजक श्री मृणाल कुमार पाठक (बीआईटी मेसरा) एवं डॉ. संदीप बिस्वास (केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड, रांची) हैं। सह-संयोजक के रूप में डॉ. अभय रंजन (एमिटी विश्वविद्यालय, रांची) और डॉ. रोहित कुमार पांडेय (बीआईटी मेसरा) सहयोग कर रहे हैं।
सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. धर्मेंद्र कुमार चांद हैं। आयोजन समिति में डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह, डॉ. अनन्या साहा, डॉ. अंकुर रंजन, डॉ. रिया मिश्रा, डॉ. अनुष्का सिन्हा एवं डॉ. अमित रघुवंशी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
इस सम्मेलन में डेटा सुरक्षा और अकादमिक ईमानदारी के साथ-साथ यह भी विश्लेषण किया जाएगा कि एआई आधारित प्रणालियाँ और इंटरैक्टिव तकनीकें भाषा अधिगम की दैनिक प्रक्रियाओं को किस प्रकार प्रभावित कर रही हैं तथा इनका शिक्षकों की बदलती भूमिका और रचनात्मकता पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे समय में, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शैक्षणिक नीतियों से कहीं अधिक तेजी से कक्षाओं को प्रभावित कर रहा है, यह सम्मेलन भाषा शिक्षा को नैतिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक नेतृत्व के एक सशक्त मंच के रूप में स्थापित करता है।













