रांची: ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर प्रक्रिया के दौरान कमीशनखोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव संजीव लाल, तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम और उनसे जुड़े लोगों की कुल 86.61 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति को स्थायी रूप से जब्त कर लिया है।
ईडी की एडजुकेटिंग अथॉरिटी ने इस मामले में पहले की गई अस्थायी जब्ती को सही ठहराते हुए अब उसे स्थायी करने का आदेश जारी किया है। जांच में सामने आया है कि इस पूरी राशि में से 48.94 करोड़ रुपये की संपत्ति अकेले पूर्व मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम और उनके परिजनों के नाम पर दर्ज है, जो इस घोटाले का सबसे बड़ा लाभार्थी बताया जा रहा है।
दिल्ली में छिपाया गया काला धन
ईडी की जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि वीरेंद्र राम ने भ्रष्टाचार से अर्जित धन को छिपाने के लिए दिल्ली जैसे महानगरों में भारी निवेश किया। संपत्तियों की रजिस्ट्री में कीमत कम दर्शाई गई, जबकि असल में करोड़ों रुपये नकद भुगतान किए गए।
दिल्ली के साकेत इलाके में पिता गेंदा राम के नाम पर 22 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी गई, जिसके लिए लगभग 18.50 करोड़ रुपये नकद चुकाने के साक्ष्य मिले हैं। वहीं पत्नी राजकुमारी के नाम पर 11.30 करोड़ रुपये का फ्लैट खरीदा गया, जिसमें 6.35 करोड़ रुपये नकद दिए गए थे। इसके अलावा साकेत में ही करीब 5 करोड़ रुपये कीमत वाला एक अन्य फ्लैट खरीदा गया, जिसमें 3.22 करोड़ रुपये नकद भुगतान किया गया।
झारखंड में भी फैली संपत्तियों की जड़ें
ईडी को जांच के दौरान झारखंड के जमशेदपुर में एक डुप्लेक्स और रांची के पिठोरिया इलाके में जमीन से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। इससे साफ होता है कि भ्रष्टाचार से अर्जित धन को कई जगहों पर निवेश कर संपत्ति का जाल खड़ा किया गया था।
लग्जरी गाड़ियों का काफिला
जांच एजेंसी को यह भी पता चला है कि वीरेंद्र राम ने अपने परिवार के नाम पर कई महंगी गाड़ियां खरीदीं। बेटे आयुष के नाम पर ऑडी और फॉर्च्यूनर, पत्नी के नाम पर एक ऑडी कार, जबकि सास पानामति देवी को 27 लाख रुपये की स्कोडा कार उपहार में दी गई थी। ईडी के मुताबिक, इन सभी वाहनों की खरीद में भी संदिग्ध धन का इस्तेमाल किया गया।
दर्जनभर इंजीनियरों को ईडी का समन
इस मामले की जांच अब और तेज होने वाली है। ईडी ने ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े दर्जनभर इंजीनियरों को समन जारी किया है। सभी को अलग-अलग तिथियों पर ईडी कार्यालय में पेश होने का निर्देश दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, 11 फरवरी के बाद इन सभी से गहन पूछताछ की जाएगी।
ईडी का मानना है कि यह मामला सिर्फ कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।









