गढ़वा: आनंदमार्ग प्रचारक संघ, सोनपुरवा (गढ़वा मुख्यालय) की ओर से आनंदमार्गी बंधुओं ने नीलकंठ दिवस जागृति के रूप में मनाया। इस अवसर पर श्रद्धेय बाबा श्री श्री आनंदमूर्ति जी के निर्देशानुसार जरूरतमंद, भूखे-प्यासे सैकड़ों लोगों के बीच विभिन्न सार्वजनिक स्थलों अस्पताल परिसर, रेलवे स्टेशन, हाट-बाजार तथा घुमंतू क्षेत्रों में स्वादिष्ट भोजन का वितरण किया गया। बताया गया कि प्रत्येक आनंदमार्गी परिवार इस दिन अपने घरों में दुगुना भोजन बनाकर परिवार के साथ-साथ लाचार एवं जरूरतमंद लोगों को भोजन कराता है।

भुक्ति प्रधान धर्मेंद्र देव ने कहा कि गुरुदेव का निर्देश है कि यदि कोई पाप शक्ति दूसरों को कष्ट देती है तो उसका उत्तर तामसिक या राजसिक क्रोध से नहीं, बल्कि सात्विक क्रोध और सकारात्मक परिवर्तन के कार्यों से देना चाहिए। इसी भाव से “विष का उत्तर अमृत” के रूप में जरूरतमंदों को भोजन कराकर नीलकंठ दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि 12 फरवरी 1973 को आनंदमार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी को बिहार के पटना स्थित बांकीपुर केंद्रीय कारा में दवा के नाम पर विष दिए जाने की घटना के विरोध में उन्होंने तत्कालीन सरकार को सूचना देकर अप्रैल 1973 से अन्न-जल त्यागकर उपवास आरंभ किया। न्यायिक जांच की मांग पूरी नहीं होने पर उनका उपवास 5 वर्ष 4 माह 2 दिन तक चला। पटना हाईकोर्ट से झूठे हत्या मामले में बरी होने के बाद 2 अगस्त 1978 को उनकी रिहाई हुई।
तब से आनंदमार्ग के अनुयायी हर वर्ष 12 फरवरी को पाप शक्ति के विरुद्ध संग्राम का संकल्प लेते हुए सेवा-कार्य कर नीलकंठ दिवस मनाते हैं।
इस अवसर पर सेवा धर्म मिशन सचिव कैलाश दादा जी, रिलीफ सेक्रेटरी सुचित लाल दादा जी, कल्चर सेक्रेटरी गौतम देव जी सहित रोहित जी, अमन देव, सुधांशु देव एवं मनोज दादा जी उपस्थित थे।














