मुंगेर: देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के केंद्र और राज्य सरकार के संकल्प की दिशा में आज एक बड़ी सफलता सामने आई है। बिहार में नक्सल विरोधी अभियान को उस समय अहम कामयाबी मिली, जब कुख्यात और इनामी नक्सली सुरेश कोड़ा ने आत्मसमर्पण कर दिया। 25 वर्षों से फरार चल रहा सुरेश कोड़ा बिहार के जेबी जोन में नक्सलियों का सबसे बड़ा और प्रभावशाली कमांडर माना जाता था। उस पर तीन लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके सरेंडर को नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
60 से अधिक संगीन मामलों में था वांछित
सुरेश कोड़ा पर हत्या, अपहरण, लेवी वसूली समेत कुल 60 से अधिक मामले दर्ज थे। वह मुंगेर, लखीसराय, जमुई और झारखंड के कई इलाकों में नक्सली गतिविधियों को संचालित कर रहा था। दर्जनों पुलिस मुठभेड़ों में वह सुरक्षा बलों को चकमा देकर फरार हो चुका था।
हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद
आत्मसमर्पण के दौरान सुरेश कोड़ा के पास से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं। इनमें
2 INSAS राइफल, 1 AK-47 राइफल, 1 AK-56 राइफल, 505 कारतूस (INSAS-215, SLR-197, AK-47-93) और 10 मैगजीन शामिल हैं।
कई बड़ी वारदातों में रहा शामिल
सुरेश कोड़ा पर कई सनसनीखेज घटनाओं को अंजाम देने के आरोप हैं। वर्ष 2018 में उसने एक एसएसबी जवान की हत्या की थी। इसी साल आठ मजदूरों के अपहरण की घटना में भी उसका नाम सामने आया था। वर्ष 2022 में नक्सल विरोधी अभियान में जुटे जवानों पर गोलीबारी करने का भी आरोप है। इसके अलावा कई जनप्रतिनिधियों की हत्या के मामलों में भी वह वांछित रहा है।
आत्मसमर्पण पर मिलेगी सरकारी सहायता
सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सुरेश कोड़ा को सरकार द्वारा घोषित 3 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा। इसके अलावा पांच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही 3,60,000 रुपये का रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण भत्ता (36 माह तक 10,000 रुपये प्रतिमाह) और प्रत्यर्पित हथियारों के बदले 71,515 रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।













