पश्चिम बंगाल : विधानसभा चुनाव के पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बहुत बड़ा झटका लगने की खबर है। टीएमसी में नंबर दो के नाम से जाने जाने वाले मुकुल राय का निधन की हो गया है। पूर्व रेल मंत्री और वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय का निधन हो गया। कोलकाता के एक अस्पताल में तड़के करीब 1:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
वे 71 वर्ष के थे और लंबे समय से कई बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके जाने से राज्य की राजनीति में एक खालीपन महसूस किया जा रहा है, क्योंकि वे उन नेताओं में थे जिन्होंने परदे के पीछे रहकर बड़े राजनीतिक फैसलों की दिशा तय की।
मुकुल रॉय ने All India Trinamool Congress की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। वे पार्टी की संस्थापक टीम का हिस्सा रहे और लंबे समय तक ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगी माने जाते थे। 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक जीत के पीछे उनकी रणनीति को बड़ी वजह माना जाता है। उस दौर में उन्हें तृणमूल का ‘नंबर दो’ नेता कहा जाता था।
दिल्ली की सियासत में भी मजबूत पकड़
मुकुल रॉय ने केंद्र सरकार में भी अहम जिम्मेदारियां संभालीं। वे 2009 में शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे। इसके बाद 2011 से 2012 तक रेल मंत्रालय की कमान संभाली। शहरी विकास मंत्रालय में भी उन्होंने काम किया। संगठन और सरकार, दोनों स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती थी।
विवाद, दल बदल और वापसी
साल 2017 में नारदा स्टिंग विवाद के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और 2020 में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने। पश्चिम बंगाल में भाजपा की रणनीति तैयार करने में उनकी बड़ी भूमिका रही। हालांकि 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद वे फिर तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी। मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उनकी पहचान एक कुशल रणनीतिकार के रूप में हमेशा याद की जाएगी। उनके निधन से बंगाल की राजनीति का एक अहम अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया।













