बेरूत: मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच इज़रायल पर दक्षिणी लेबनान के रिहायशी इलाकों में प्रतिबंधित माने जाने वाले सफेद फॉस्फोरस (White Phosphorus) हथियारों के इस्तेमाल का आरोप लगा है। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि इस तरह के हथियारों का घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है और इससे आम नागरिकों की जान को गंभीर खतरा होता है।
सोमवार को जारी रिपोर्ट में संगठन ने कहा कि उसने सात तस्वीरों की पुष्टि की है, जिनमें दक्षिणी लेबनान के योहमोर (Yohmor) इलाके के एक आवासीय क्षेत्र के ऊपर सफेद फॉस्फोरस गोले दागे जाते दिखाई दे रहे हैं। यह घटना 3 मार्च की बताई जा रही है, जिसके बाद इलाके के कम से कम दो घरों में आग लग गई थी।
एचआरडब्ल्यू के लेबनान शोधकर्ता रमजी कैस ने कहा कि रिहायशी इलाकों में इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है। उनके मुताबिक, सफेद फॉस्फोरस के जलने वाले प्रभाव से लोगों की मौत हो सकती है या उन्हें ऐसी गंभीर चोटें लग सकती हैं, जिनका दर्द उन्हें जिंदगी भर झेलना पड़ता है। यह त्वचा को गहराई तक जलाता है, हड्डियों को गला देता है और इसके धुएं से श्वसन तंत्र (Respiratory system) पूरी तरह फेल हो सकता है। इसकी भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह 815 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान पैदा करता है। जब यह रसायन त्वचा पर गिरता है तो यह मांस को गलाते हुए सीधा हड्डियों तक पहुंच जाता है. इसके घाव कभी ठीक नहीं होते। रिहायशी इलाकों या नागरिकों के पास इसे ‘आग लगाने वाले हथियार’ के रूप में इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के तहत सख्त प्रतिबंधित है।
रिपोर्ट के अनुसार, हवा में फटने वाले सफेद फॉस्फोरस हथियार घनी आबादी वाले इलाकों में अंधाधुंध असर डालते हैं। ऐसे हथियार ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही जलने लगते हैं और घरों, खेती की जमीनों तथा अन्य नागरिक संपत्तियों में आग लगा सकते हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए इनका इस्तेमाल अत्यधिक सावधानी के साथ ही किया जा सकता है।
एचआरडब्ल्यू ने कहा कि 3 मार्च की सुबह लेबनानी मीडिया द्वारा ऑनलाइन साझा की गई एक तस्वीर की भी पुष्टि की गई है। जियोलोकेशन के आधार पर यह पाया गया कि उस तस्वीर में कम से कम दो तोप से दागे गए सफेद फॉस्फोरस गोले रिहायशी इलाके के ऊपर हवा में फटते दिखाई दे रहे हैं।
संगठन के मुताबिक, इन विस्फोटों से बने धुएं के बादल का आकार M825-सीरीज 155 मिमी आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल से निकलने वाले नकल पैटर्न जैसा था, जो आमतौर पर सफेद फॉस्फोरस गोले में देखा जाता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि स्थानीय सिविल डिफेंस टीम द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों की भी जांच की गई। इन तस्वीरों में राहतकर्मी घरों की छतों और एक कार में लगी आग को बुझाते दिखाई दे रहे हैं। संगठन का अनुमान है कि यह आग संभवतः सफेद फॉस्फोरस से भरे फेल्ट वेज (felt wedges) के कारण लगी, जो गोले के हवा में फटने के बाद आसपास के क्षेत्रों में गिर जाते हैं।
रणजी कैस ने कहा कि इज़रायल को तुरंत इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल बंद करना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जो देश इज़रायल को हथियार मुहैया करा रहे हैं, वे सैन्य सहायता और हथियारों की बिक्री पर रोक लगाएं और उस पर दबाव बनाएं कि रिहायशी इलाकों में ऐसे हथियारों का इस्तेमाल न किया जाए।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इज़रायली सैन्य कार्रवाई और जबरन विस्थापन आदेशों के कारण लेबनान में पांच लाख से अधिक लोग अपने घरों से बेघर होकर विस्थापित के रूप में पंजीकृत हो चुके हैं।
वहीं लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार, सोमवार को इज़रायल ने राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में कई हवाई हमले किए। इनमें घोबिरी और हरेत हरेक के बीच का इलाका तथा सफीर क्षेत्र शामिल हैं।
इन हमलों के बीच इज़रायली सेना का कहना है कि वह लेबनान में सक्रिय हिजबुल्ला के ठिकानों को निशाना बना रही है। हालांकि 2 मार्च 2026 से 8 मार्च 2026 के बीच हुए हमलों में कम से कम 394 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 83 बच्चे और 42 महिलाएं शामिल हैं। जबकि 1100 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
एचआरडब्ल्यू ने इज़रायल के प्रमुख सहयोगी देशों- अमेरिका और जर्मनी से अपील की है कि वे इज़रायल को हथियारों की बिक्री रोकें और कथित गंभीर अपराधों में शामिल अधिकारियों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने पर विचार करें।
संगठन के अनुसार, इजरायल ने अक्टूबर 2023 से मई 2024 के बीच भी दक्षिणी लेबनान के सीमा गांवों में कई बार सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया था, जिससे नागरिकों के लिए गंभीर खतरा पैदा हुआ था।












