गढ़वा: जिला मुख्यालय के ग्राम जोबरईया स्थित बंडा पहाड़ के नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय विराट श्री रूद्र महायज्ञ के अंतर्गत प्रतिदिन संध्याकाल 6 बजे पावन श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। महायज्ञ के छठे दिन अवध धाम से पधारे आचार्य पंकज शांडिल्य जी महाराज ने भगवान राम और माता सीता के पावन विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथा के दौरान आचार्य पंकज शांडिल्य जी महाराज ने कहा कि विवाह एक पवित्र बंधन है, जहां दो विचारों का मिलन होकर एक संस्कार का रूप लेता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में विवाह समारोहों में दहेज रूपी दानव, अत्यधिक दिखावा और अनावश्यक प्रदर्शन देखने को मिलता है, जो सनातन धर्म की मूल भावना के विपरीत है। सच्चे सनातनधर्मियों को भगवान राम और माता सीता के विवाह से प्रेरणा लेकर सादगीपूर्ण और वैदिक परंपरा के अनुसार विवाह संस्कार संपन्न करना चाहिए।
कथा के दौरान भगवान राम और माता सीता के जयमाल प्रसंग का सुंदर वर्णन किया गया। इसके बाद महाराज दशरथ को सूचना मिलने और अयोध्या से बारात आने का प्रसंग सुनाया गया। कथा में बताया गया कि एक ही मंडप में भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न- चारों भाइयों का विवाह संस्कार संपन्न हुआ।
कथा के समापन पर वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा भगवान राम-सीता विवाह की सुंदर झांकी तथा मयूर नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूज्य महाराज के साथ आए संगीतकारों ने भी भक्ति गीतों के माध्यम से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

महायज्ञ के छठे दिन की शुरुआत पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह भगवान भोलेनाथ के रुद्राभिषेक से हुई। इसके बाद दैनिक हवन-पूजन संपन्न हुआ। संध्या 6 बजे यज्ञशाला के समीप निर्मित भव्य कथा मंडप में व्यासपीठ पूजन के साथ श्रीराम कथा का प्रवचन प्रारंभ हुआ, जिसमें सभी यजमानों ने भाग लिया।
आज के कथा कार्यक्रम में नवादा ग्राम निवासी भारतीय सेना के जवान अकिलदेव पाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने ठाकुर जी, कथा व्यास तथा यज्ञाधीश महाराज को माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में श्री रुद्र महायज्ञ के प्रधान संयोजक राकेश पाल, जागृति युवा क्लब के अध्यक्ष तथा मुख्य यजमान जितेंद्र कुमार पाल मंच पर उपस्थित रहे। व्यासपीठ पूजन के पश्चात यज्ञ समिति के सक्रिय सदस्यों धनंजय चंद्रवंशी, उदय पाल, दसई पाल और सुविंदर राम को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
साथ ही नीलकंठ महादेव मंदिर की सीढ़ियों और शेड में टाइल्स व मार्बल लगाकर मंदिर परिसर को सुंदर और व्यवस्थित बनाने में योगदान देने वाले पिंडरा और सुखवाना निवासी सिद्धनाथ हलवाई के पुत्र जयप्रकाश हलवाई और विजय प्रसाद हलवाई को भी यज्ञाधीश महाराज, प्रधान संयोजक और मुख्य यजमान द्वारा संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया।

महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन सुबह 6 बजे से ही श्रद्धालु ॐ नमः शिवाय और हर-हर महादेव के जयकारों के साथ यज्ञशाला की परिक्रमा करना शुरू कर देते हैं, जो दोपहर तक जारी रहता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महायज्ञ में भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
मेला परिसर में पूजा-प्रसाद सामग्री की दुकानें, श्रृंगार स्टोर, मिठाई की दुकानें, खिलौने की दुकानें और झूले आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
प्रधान संयोजक राकेश कुमार पाल ने आयोजन समिति के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि महायज्ञ के दौरान पूरे क्षेत्र में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। भंडारे में उपयोग किए जाने वाले गिलास और पत्तलों का प्रतिदिन व्यवस्थित ढंग से निपटारा किया जाए तथा मेला परिसर में लगाए गए टैंकरों में पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
कार्यक्रम में नवादा से सुखबीर पाल, रमेश पाल, गढ़वा प्रखंड की पूर्व प्रमुख तेतरी देवी, राम प्रसाद राम, गोविंद उच्च विद्यालय के शिक्षक रमाशंकर देव, बलराम, विजय कुमार, अमित कुमार चौबे, हिमांशु पाठक सहित जिला प्रशासन की ओर से प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी विनोद कुमार गुप्ता मुख्य रूप से उपस्थित रहे।














