गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में एक महिला सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक ये सभी आरोपी पाकिस्तान में बैठे एक हैंडलर के संपर्क में थे और देश की संवेदनशील जगहों से जुड़ी जानकारी, फोटो और वीडियो उसे भेजते थे।
रेलवे स्टेशन और सुरक्षा ठिकानों की बनाते थे वीडियो
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी लगातार रेलवे स्टेशनों, सैन्य ठिकानों और सुरक्षा एजेंसियों के कार्यालयों की तस्वीरें व वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजते थे। पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई संवेदनशील लोकेशनों की तस्वीरें और वीडियो मिले हैं। बताया जा रहा है कि पिछले करीब एक वर्ष में आरोपियों ने 50 से अधिक वीडियो पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर को भेजे थे।
गुप्त सूचना पर हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने शनिवार सुबह गुप्त सूचना के आधार पर भोवापुर तिराहे के पास से मेरठ के परतापुर निवासी सुहेल मलिक, भोवापुर निवासी प्रवीन, राज, शिवा और रितिक को गिरफ्तार किया। इनसे पूछताछ के बाद संभल निवासी साने इरम उर्फ महक को आनंद विहार बॉर्डर से पकड़ा गया।
दिल्ली में लगाए थे आईपी सोलर कैमरे
पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से आठ मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। इन मोबाइलों में दिल्ली के कई रेलवे स्टेशनों और सैन्य ठिकानों की फोटो-वीडियो मौजूद हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने दिल्ली के कुछ स्थानों पर आईपी सोलर कैमरे भी लगाए थे, जिनके जरिए वहां की लाइव वीडियो पाकिस्तान भेजी जाती थी। फिलहाल आरोपियों ने दिल्ली में ऐसे एक स्थान की जानकारी दी है, जिसकी सूचना दिल्ली पुलिस को दे दी गई है। आगे की जांच में अन्य स्थानों का भी खुलासा हो सकता है।
लोकेशन के हिसाब से मिलते थे पैसे
जांच में पता चला है कि पाकिस्तान से आने वाली मांग के अनुसार आरोपी अलग-अलग स्थानों पर जाकर फोटो और वीडियो बनाते थे। इसके बदले उन्हें प्रति लोकेशन पांच से आठ हजार रुपये तक मिलते थे। पुलिस को अब तक आरोपियों के मोबाइल से एक पाकिस्तानी नंबर मिला है, जिसके जरिए वॉट्सऐप चैट के माध्यम से बातचीत होती थी। बताया जा रहा है कि सुहेल के खाते में ही पाकिस्तान से रकम भेजे जाने के संकेत मिले हैं, जबकि बाकी आरोपियों के बैंक खातों की भी जांच की जा रही है।
संवेदनशील स्थानों के मिले फोटो-वीडियो
पुलिस के मुताबिक आरोपियों के मोबाइल से दिल्ली स्थित आनंद विहार रेलवे स्टेशन, दिल्ली कैंटोनमेंट, बीएसएफ और सीआरपीएफ मुख्यालय सहित 20 से अधिक संवेदनशील स्थानों के फोटो-वीडियो बरामद हुए हैं। अब तक 50 से ज्यादा वीडियो और बड़ी संख्या में तस्वीरें मिली हैं। पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों और चैट की जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि इन जानकारियों के आधार पर दिल्ली में किसी बड़ी घटना की साजिश रची जा रही थी।
गिरोह का सरगना और नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह का सरगना सुहेल मलिक मेरठ में रह रहा था और मूल रूप से बिजनौर का रहने वाला है। उसके अलावा राज वाल्मीकि औरैया, शिवा बदायूं और रितिक शाहजहांपुर का निवासी बताया जा रहा है। सुहेल और इरम के अलावा बाकी चारों भोवापुर में किराये के मकान में रहते थे और साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों में काम करते थे।
युवाओं को जोड़ने का काम करती थी इरम
जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह में सुहेल के बाद इरम का स्थान था। वह युवाओं की पहचान कर उन्हें इस नेटवर्क से जोड़ने का काम करती थी। शुरुआत में उनसे सामान्य फोटो-वीडियो लेने को कहा जाता और पहली बार पैसे मिलने के बाद वे बिना सवाल किए काम करते रहते थे। आशंका जताई जा रही है कि गिरोह में कुछ और युवतियां भी शामिल हो सकती हैं।
खुफिया एजेंसियों ने भी की पूछताछ
आरोपियों की गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही खुफिया एजेंसियों को भी जानकारी दी गई। इसके बाद एटीएस, आईबी और स्थानीय खुफिया इकाई की टीमों ने आरोपियों से लंबी पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए।
पड़ोसियों की सतर्कता से खुली साजिश
पुलिस के मुताबिक आरोपी दिल्ली समेत आसपास के इलाकों में घूम-घूमकर फोटो और वीडियो बनाते थे। पड़ोसियों को उन्होंने बताया था कि ऐसा करने पर उन्हें पैसे मिलते हैं और वे दूसरों को भी इस काम से जोड़ने की कोशिश कर रहे थे। स्थानीय लोगों को उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं और उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरे गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया।
न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी
पुलिस ने सभी छह आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों और बैंक लेनदेन की जांच जारी है और मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है।














