तेहरान: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने क्षेत्रीय संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है। युद्ध अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और दोनों पक्षों के बीच टकराव लगातार तीव्र होता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब को निशाना बनाकर मार गिराया है, जिसे तेहरान की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
इससे ठीक एक दिन पहले ही ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारीजानी की मौत की पुष्टि हुई थी। लगातार हो रहे इन हमलों ने यह संकेत दे दिया है कि इजरायल अब पारंपरिक युद्ध सीमाओं से आगे बढ़कर सीधे नेतृत्व पर प्रहार की रणनीति अपना चुका है।
इजरायल के रक्षा मंत्री योआव कैट्ज़ ने साफ शब्दों में कहा है कि सेना को अब किसी भी ईरानी वरिष्ठ अधिकारी को निशाना बनाने की खुली छूट दे दी गई है। इस नई नीति के तहत अब हर कार्रवाई के लिए अलग से राजनीतिक मंजूरी की जरूरत नहीं होगी, जिससे ऑपरेशन की गति और आक्रामकता दोनों बढ़ने की संभावना है।
खतीब को ईरान की घरेलू खुफिया संरचना का मुख्य स्तंभ माना जाता था। वे न केवल आंतरिक विरोध को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते थे, बल्कि विदेशों में गुप्त अभियानों के समन्वय में भी उनकी बड़ी जिम्मेदारी थी। 2022 में अमेरिका ने उनके ऊपर गंभीर प्रतिबंध लगाए थे। इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया कि ईरान में हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों को कुचलने में खतीब की बड़ी भूमिका थी। उन्हीं के इशारे पर बड़े पैमाने पर लोगों की गिरफ्तारियां और हत्याएं की गईं। आईडीएफ ने खतीब पर दुनिया में इजरायली और अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ आतंकी गतिविधियां चलाने का भी आरोप लगाया है। उनकी हत्या को इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) की बड़ी रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान की निगरानी और खुफिया क्षमता को कमजोर करना है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्रालय ने नौकरशाही प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए सैन्य कार्रवाई को अधिक स्वतंत्रता दे दी है। इससे युद्ध अब लीडरशिप टार्गेटिंग यानी नेतृत्व को खत्म करने की रणनीति में बदलता दिख रहा है।
यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को उस समय शुरू हुआ था, जब अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद हालात तेजी से बिगड़े और अब यह युद्ध सीधे उच्च स्तर के नेताओं को निशाना बनाने तक पहुंच चुका है।
इजरायल पहले ही फिलिस्तीनी संगठन ‘फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद’ के सैन्य प्रमुख अकरम अल-अजूरी पर हमला कर चुका है और अब नए संभावित सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को भी निशाने पर लेने की चेतावनी दे चुका है। मोजतबा खामेनेई के बारे में बताया जा रहा है कि वे लगातार ठिकाने बदल रहे हैं और सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ रहे।
लारीजानी और खतीब जैसे अनुभवी नेताओं की मौत से ईरान की सत्ता संरचना में बड़ा खालीपन पैदा हो सकता है। इससे न केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित होगी, बल्कि आंतरिक अस्थिरता भी बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, ईरान ने भी खतीब की मौत की पुष्टि करते हुए इसे कायरतापूर्ण हमला बताया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि देश ने अपने महत्वपूर्ण नेताओं को खो दिया है, लेकिन उनका मिशन और मजबूत होकर आगे बढ़ेगा।
तेहरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह इस हमले का जवाब देगा, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है। अब संघर्ष का फोकस ईरान के “शैडो नेटवर्क” और क्षेत्रीय सहयोगियों पर भी आ गया है, जिन्हें इजरायल कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
आने वाले दिनों में यह संघर्ष और भी गंभीर रूप ले सकता है, जिसका असर पूरे मिडिल ईस्ट ही नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी पड़ने की संभावना है।














