नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति बाधाओं को देखते हुए भारत में घरेलू एलपीजी को लेकर एक नई रणनीति पर विचार किया जा रहा है। सरकारी तेल विपणन कंपनियां आपूर्ति को संतुलित रखने के लिए 14.2 किलोग्राम वाले मानक घरेलू सिलेंडरों में गैस की मात्रा अस्थायी रूप से घटाकर लगभग 10 किलोग्राम करने की योजना पर काम कर रही हैं।
क्या है नई योजना?
प्रस्तावित योजना के तहत उपभोक्ताओं को मिलने वाले सिलेंडरों में गैस की मात्रा कम होगी, लेकिन इसकी कीमत भी उसी अनुपात में घटाई जाएगी। सिलेंडरों पर नई मात्रा को दर्शाने वाला संशोधित लेबल लगाया जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी मिल सके। इस कदम का मकसद सीमित उपलब्ध गैस को अधिक से अधिक घरों तक पहुंचाना है।
क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60% आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) क्षेत्र में अस्थिर हालात के कारण आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। कई भारतीय टैंकर इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
तकनीकी और नियामकीय अड़चनें
इस योजना को लागू करने के लिए बॉटलिंग प्लांट्स में री-कैलिब्रेशन जैसे तकनीकी बदलाव जरूरी होंगे। साथ ही, इसके लिए नियामकीय मंजूरी भी लेनी पड़ सकती है, जिससे इसे लागू होने में कुछ समय लग सकता है।
देश में एलपीजी की खपत
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में रोजाना करीब 93,500 टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें से 86% से अधिक घरेलू उपयोग में आता है। ऐसे में आपूर्ति में मामूली बाधा भी बड़े स्तर पर असर डाल सकती है।
सरकार का क्या कहना है?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल देश में कहीं भी एलपीजी की ड्राई-आउट स्थिति नहीं है और डिलीवरी सामान्य रूप से जारी है। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे घबराकर सिलेंडर की बुकिंग न करें।
सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। रिफाइनरियों से घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। काॅमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति आंशिक रूप से बहाल की गई है।
काॅमर्शियल सेक्टर को राहत
हाल ही में सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट, औद्योगिक कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और सामुदायिक रसोई जैसे क्षेत्रों के लिए एलपीजी आवंटन में 20% तक बढ़ोतरी की घोषणा की है। यह अतिरिक्त गैस उन संस्थानों को मिलेगी, जो तेल कंपनियों के साथ पंजीकरण कराएंगे और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन के लिए आवेदन करेंगे।













