रांची: आज लोकसभा में माननीय सांसद विष्णु दयाल राम ने नियम 377 के तहत झारखंड के पलामू संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पलामू और गढ़वा जिलों में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल-जल’ योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं, कागजी प्रगति और संभावित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया।
सांसद राम ने बताया कि सरकारी अभिलेखों में दोनों जिलों को 75–80 प्रतिशत से अधिक ‘हर घर नल-जल’ कवरेज वाला दिखाया गया है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। पलामू जिले के छतरपुर, चैनपुर, हुसैनाबाद, पांडू, पाटन और सदर मेदिनीनगर प्रखंडों के साथ-साथ गढ़वा जिले के कांडी, मझिआंव, भंडरिया, रमना, भवनाथपुर और मेराल प्रखंडों के अधिकांश गांवों में नल कनेक्शन या तो पूरी तरह निष्क्रिय हैं या हफ्तों में केवल एक बार पानी की आपूर्ति होती है।
कई स्थानों पर बिना स्थायी जलस्रोत सुनिश्चित किए ही पाइपलाइन बिछा दी गई है। वहीं, अधूरी और अनुपयोगी ओवरहेड टंकियों के बावजूद कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी कर दिए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप हजारों परिवार आज भी हैंडपंप, कुएं और तालाबों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं, जबकि कागजों में योजनाओं को पूर्ण दिखाया जा चुका है।
सांसद ने मांग की कि कागजी प्रगति और वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन कराया जाए, दोषी अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तथा प्रभावित गांवों में स्थायी जलस्रोत के साथ नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि पलामू और गढ़वा दोनों ही सूखा-प्रभावित और आकांक्षी जिले हैं, जहां पेयजल की उपलब्धता जीवन, स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़ा मूल प्रश्न है। इस योजना की विफलता का सबसे अधिक असर महिलाओं, बच्चों और गरीब वर्ग पर पड़ रहा है।
अंत में उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार से उच्चस्तरीय जांच कराने और योजनाओं को धरातल पर पूरी तरह लागू कराने का अनुरोध किया।












