बोकारो:पिंडराजोड़ा थाना क्षेत्र में नाबालिग के अपहरण और हत्या मामले की जांच के दौरान हुई, जिसमें पुलिसकर्मियों पर पैसे लेकर केस दबाने और गोपनीयता भंग करने जैसे गंभीर आरोप सामने आने पर बोकारो एसपी ने पिंडराजोड़ा थाना में तैनात 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ निलंबित कर दिया था। इन पर अभियुक्तों के साथ साठगांठ कर मामले की जांच को कमजोर करने का गंभीर आरोप है। निलंबित कर्मियों में 10 सब-इंस्पेक्टर, 5 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर, 2 हवलदार और 11 सिपाही शामिल हैं। इधर दूसरी ओर पुलिस कर्मियों के निलंबन के खिलाफ पुलिस एसोसिएशन ने बोकारो एसपी को ही चुनौती दे डाली है। एसोसिएशन ने इस फैसले को अन्यायपूर्ण और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने बोकारो एसपी के खिलाफ कड़ा रुख अपना लिया है.
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरे मामले की सही समीक्षा करने में पुलिस अधीक्षक विफल रहे हैं. उनका आरोप है कि जिले में कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण कमजोर हो गया है और अपनी प्रशासनिक कमियों को छिपाने के लिए निर्दोष पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया जा रहा है.
उन्होंने यह भी कहा कि एक ही थाने के 28 कर्मियों को एक साथ सस्पेंड करना न केवल गलत निर्णय है, बल्कि इससे पुलिस बल का मनोबल भी गिरता है. एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि वह इस फैसले के खिलाफ हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगा चाहे वह सरकार के सामने मुद्दा उठाना हो या कानूनी कदम उठाना.
एसोसिएशन ने मांग की है कि निर्दोष कर्मियों का निलंबन तुरंत वापस लिया जाए, बोकारो एसपी को पद से हटाया जाए और ट्रांसफर-पोस्टिंग प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे विवाद न हों.
बता दें कि पिंडराजोड़ा थाना में 28 पुलिसकर्मियों को अभियुक्तों से साठगांठ कर जांच प्रभावित करने के आरोप में निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई एक नाबालिग के अपहरण और हत्या मामले की जांच के दौरान हुई, जिसमें पुलिसकर्मियों पर पैसे लेकर केस दबाने और गोपनीयता भंग करने जैसे गंभीर आरोप सामने आए।
पिंडराजोड़ा थाना में तैनात 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ निलंबित कर दिया गया है। इन पर अभियुक्तों के साथ साठगांठ कर मामले की जांच को कमजोर करने का गंभीर आरोप है। निलंबित कर्मियों में 10 सब-इंस्पेक्टर, 5 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर, 2 हवलदार और 11 सिपाही शामिल हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया। नई टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी दिनेश महतो को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर मृतका के कंकाल के अवशेष, कपड़े, बाल, रबर बैंड और हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद किया गया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी युवती पर शादी का दबाव बना रहा था। विरोध करने पर उसने चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी।
गौरतलब है कि पुष्पा 21 जुलाई 2025 से लापता थी और उसकी तलाश के लिए 25,000 रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। परिजनों ने युवती के नहीं मिलने पर हाईकोर्ट का रुख किया, जहां पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई गई। अदालत ने डीजीपी से लेकर एसपी तक को तलब किया था और डीआईजी स्तर की एक सदस्यीय कमेटी से जांच के निर्देश दिए थे। हाल ही में डीआईजी संध्या रानी मेहता ने बोकारो पहुंचकर मामले की जांच की है। इस केस की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को निर्धारित है।








