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‘बंगाल बुलडोजर स्टेट नहीं’ — ममता के बयान के बीच विरोध प्रदर्शन, धक्का-मुक्की के बाद मामला HC पहुंचा

On: May 14, 2026 2:42 PM
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झारखंड वार्ता डेस्क

कोलकातापश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो  ममता बनर्जी को गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट परिसर में विरोध और नारेबाजी का सामना करना पड़ा। चुनाव बाद हुई कथित हिंसा से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान जब ममता बनर्जी कोर्ट रूम से बाहर निकल रही थीं, तभी वकीलों के एक समूह ने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान “चोर-चोर” के नारे लगाए गए और माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध के दौरान कुछ लोगों द्वारा आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की गईं। इस बीच ममता बनर्जी ने वकीलों की ओर इशारा करते हुए कहा कि “इन लोगों ने मुझे मारा है।” घटना के बाद कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।

बताया जा रहा है कि गुरुवार सुबह मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल की पीठ के समक्ष चुनाव बाद हुई हिंसा से जुड़े एक जनहित याचिका मामले की सुनवाई चल रही थी। इस मामले में वकील शीर्षान्य बनर्जी द्वारा याचिका दायर की गई थी। खास बात यह रही कि ममता बनर्जी खुद अधिवक्ता के रूप में कोर्ट में पेश हुईं और पक्ष रखते हुए कहा कि “बंगाल कोई बुलडोजर स्टेट नहीं है” तथा कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने अदालत में कहा कि मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं पुलिस की ओर से अदालत में बताया गया कि सभी घटनाएं चुनाव बाद की नहीं हैं और जिन मामलों में आरोप सामने आए हैं, उनमें लगातार कार्रवाई की जा रही है।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद राज्य में पहली बार भाजपा सरकार बनी है। चुनाव परिणाम आने के बाद कई जिलों में हिंसा, आगजनी और राजनीतिक हमलों की घटनाएं सामने आई थीं, जिनको लेकर अदालत में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

इधर, तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी के समर्थन में पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने एक बार फिर साबित किया है कि वह कठिन समय में बंगाल की जनता के साथ खड़ी रहती हैं। पार्टी ने उन्हें “सत्य, न्याय और संवैधानिक मूल्यों की लड़ाई लड़ने वाली नेता” बताया।

उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी ने वर्ष 1982 में कानून की पढ़ाई पूरी की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाई कोर्ट में उनकी सक्रिय मौजूदगी केवल कानूनी लड़ाई नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश देने की भी कोशिश है। वहीं भाजपा नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को “राजनीतिक नाटक” बताते हुए चुनाव बाद हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग दोहराई है।

Shubham Jaiswal

“मैं शुभम जायसवाल, बीते आठ वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने विभिन्न प्रतिष्ठित अखबारों और समाचार चैनलों में प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले पाँच वर्षों से मैं साप्ताहिक अखबार ‘झारखंड वार्ता’ से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ। पत्रकारिता मेरे लिए केवल पेशा नहीं बल्कि समाज और जनता के प्रति एक जिम्मेदारी है, जहाँ मेरी कलम हमेशा सच और न्याय के पक्ष में चलती है।

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