रांची: गृह मंत्री अमित शाह के नक्सलवाद को समूल नष्ट करने के प्रण का प्रभाव झारखंड में भी नक्सलियों के खिलाफ चल रहे हैं अभियान से नक्सलियों की कमर टूट चुकी है और नक्सली सरेंडर करने और मुख्य धारा में जोड़ने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इसी कड़ी में पिछले दो दशक से आतंक के पर्याय बने भाकपा माओवादी संगठन के सशस्त्र उग्रवादियों का सबसे बड़ा सरेंडर गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में झारखंड डीजीपी तदाशा मिश्रा के समक्ष होगा।
बताया जा रहा है कि भाकपा माओवादियों के ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो के मुख्यालय सारंडा में दो दशक से सक्रिय माओवादियों की सबसे बड़ी टुकड़ी पुलिस मुख्यालय में डीजीपी तदाशा मिश्रा के सामने सरेंडर करेगी।
भाकपा माओवादियों के पोलित ब्यूरो सदस्य व एक करोड़ के ईनामी मिसिर बेसरा के दस्ते में सबसे बड़ी टूट के बाद एक साथ 25 माओवादी सरेंडर कर रहे हैं।
मिसिर बेसरा के दस्ते के खिलाफ चले अभियान का असर
इनमें छह सबजोनल, छह एरिया कमांडर और 13 सशस्त्र कैडर शामिल हैं। माओवादियों एक एलएमजी इंसास, चार इंसास राइफल, 9 एसएलआर, एक .303 बोल्ट राइफल, एक देसी पिस्टल, 27 मैनजीन, 2857 कारतूस, आठ वॉकीटॉकी भी सौंपेंगे। बेसरा के दस्ते के खिलाफ लगातार चले रहे अभियान के बाद माओवादियों पर मुख्यधारा में लौटने का दबाव बना है। आने वाले दिनों में अश्विन और चंदन लोहरा जैसे बड़े उग्रवादी भी सरेंडर करेंगे।
इन बड़े माओवादियों का हो रहा सरेंडर
सरेंडर करने वाले माओवादियों में एरिया कमांडर करण उर्फ डांगुर तियू के खिलाफ 29 केस दर्ज हैं। उस पर 2 लाख का इनाम है। वहीं, पांच लाख के इनामी गादी उर्फ गुलशन मुंडा पर रांची, खूंटी, सरायकेला, चाईबासा में 48 केस दर्ज हैं। पांच लाख के इनामी सबजोनल नागेंद्र मुंडा पर 38 आपराधिक मामले हैं। सबजोनल व पांच लाख की इनामी रेखा मुंडा उर्फ जयंती के खिलाफ 18 केस दर्ज हैं। सागेन आंगारिया के खिलाफ सिर्फ चाईबासा जिले में 123 मामले दर्ज हैं। दर्शन उर्फ बिंज हांसदा के खिलाफ 14, सुलेमान हांसदा के खिलाफ 13, एरिया कमांडर बैजनाथ हांसदा के खिलाफ चाईबासा में 4, बासुमति जेराई के खिलाफ 14, रघु कामय उर्फ गुणा के खिलाफ 19, किशोर सिरका के खिलाफ 11, रामदयाल मुंडा के खिलाफ सरायकेला में 3, चाईबासा में 1 मामला दर्ज है।
ये कैडर भी डाल रहे हथियार
सरेंडर करने वालों में माओवादी कैडर वंदना उर्फ शांति के खिलाफ चाईबासा में 2, सुनीता सरदार के खिलाफ 4, डांगुर बोईपाई के खिलाफ 13, बसंती देवगम के खिलाफ 5, मुन्नी राम मुंडा के खिलाफ 3, अनिशा कोडा के खिलाफ 8, सपना उर्फ सुरू कालुडिया के खिलाफ 6, सुसारी उर्फ दसमा कालुंडिया के खिलाफ 2, बिरसा कोडा उर्फ हरिसिंह के खिलाफ 21, नुअस के खिलाफ 3, बुमली तियू के खिलाफ 6, निति माई के खिलाफ 5, लादू तिरिया के खिलाफ 9 माओवादी गतिविधियों से जुड़े कांड दर्ज हैं।
राज्य में क्या है माओवादी संगठनों की स्थिति
राज्य में भाकपा माओवादी और तमाम स्पलिंटर ग्रुप अब संगठित रूप से काम नहीं कर रहे। भाकपा माओवादियों में देशभर में अब सिर्फ एक मात्र पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा बचा है। लेकिन उसके साथ अब महज दस से बाहर सशस्त्र माओवादियों का दस्ता ही मौजूद है। झारखंड के माओवादियों को अब न रसद मिल रही, ना ही बाहरी राज्यों से समर्थन, ऐसे में माओवादियों के द्वारा नए सिरे से सिर उठाने की संभावना भी नगण्य है। संगठन में रणनीतिकार से लेकर आर्म्स कैडर तक की कमी है। मिसिर बेसरा के प्रोटेक्शन दस्ते के अधिकांश सदस्य सरेंडर कर चुके हैं या उनकी गिरफ्तारी हो चुकी है। इसी तरह पीएलएफआई, टीपीसी और जेजेएमपी जैसे संगठन भी अब निष्क्रिय हो चुके हैं।










