
रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर पिछले 14 दिनों से जारी छात्र आंदोलन अब एक नई अपडेट से यह आंदोलन अहम पड़ाव पर पहुंचता नजर आ रहा है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में डटे आंदोलनकारी छात्र जहां अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, वहीं सरकार ने एक बार फिर बातचीत के जरिए गतिरोध खत्म करने की पहल की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आंदोलनरत छात्रों से संवाद के लिए आगे आने की अपील की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनना चाहती है और उनका समाधान निकालने के लिए गंभीर है। उन्होंने साफ किया कि सरकार की ओर से गठित समिति किसी तरह की औपचारिकता नहीं, बल्कि छात्रों और सरकार के बीच संवाद का माध्यम है। सरकार टकराव के बजाय बातचीत के जरिए स्थायी समाधान तलाशना चाहती है।
पूरे झारखंड के छात्रों से मांगे जाएंगे सुझाव
हेमंत सोरेन ने कहा कि जयपाल सिंह स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगें महत्वपूर्ण हैं, लेकिन भर्ती परीक्षाओं को लेकर राज्य के दूसरे जिलों के छात्र-छात्राओं की राय भी उतनी ही अहम है। सरकार का प्रयास होगा कि पूरे झारखंड के युवाओं को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
मुख्यमंत्री के मुताबिक भर्ती परीक्षाओं और आयोगों की कार्यप्रणाली में सुधार का फैसला केवल एक स्थान पर मौजूद छात्रों की राय के आधार पर नहीं होना चाहिए। इसके लिए राज्यभर के युवाओं से सुझाव लिए जाएंगे।
शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं से भी होगी रायशुमारी
सरकार की ओर से यह संकेत भी दिया गया है कि आने वाले दिनों में झारखंड के साथ देशभर के छात्रों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं से सुझाव लिए जा सकते हैं। इन सुझावों के आधार पर भर्ती व्यवस्था में जरूरी सुधार करने की योजना है।
सरकार का लक्ष्य भर्ती प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, विश्वसनीय और विवादों से मुक्त बनाना बताया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जयपाल सिंह स्टेडियम से उठ रही छात्रों की आवाज पूरे राज्य तक पहुंचे और हर जिले के युवा अपनी बात खुलकर रख सकें।
शुक्रवार शाम हो सकती है सरकार-छात्र वार्ता
एक ओर छात्र लगातार धरना जारी रखे हुए हैं, वहीं सरकार बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश में जुटी है। संभावना है कि शुक्रवार शाम आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच बातचीत हो सकती है।
हालांकि वार्ता से पहले ही प्रतिनिधिमंडल में पूर्व महाधिवक्ता को शामिल किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सत्तापक्ष ने इस पर सवाल उठाते हुए विपक्ष पर छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है।
मांगों पर अड़े छात्र, रद्दीकरण और CBI जांच की मांग
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। छात्र 14वीं JPSC सिविल सेवा PT परीक्षा समेत JPSC और JSSC की ओर से TDPL कंपनी के माध्यम से हाल में आयोजित अन्य भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा छात्र पूरे मामले की CBI जांच, दोनों भर्ती आयोगों में व्यापक सुधार और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग पर भी कायम हैं।
अब सबकी नजर शुक्रवार को होने वाली संभावित वार्ता पर है। यदि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत में कोई ठोस रास्ता निकलता है, तो पिछले दो सप्ताह से जारी इस आंदोलन को खत्म करने की दिशा में बड़ी पहल हो सकती है। वहीं, बातचीत विफल रहने की स्थिति में आंदोलन के और तेज होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।




