
दुमका: झारखंड के दुमका में करीब 45 साल पुराने दोहरे हत्याकांड के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश देते हुए 70 वर्षीय दोषी साइमन सोरेन की उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी है। अदालत ने उसे तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है। यह मामला वर्ष 1981 में हुई दो हत्याओं से जुड़ा है। मामले की न्यायिक प्रक्रिया इतनी लंबी चली कि छह आरोपियों में से तीन की हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान ही मौत हो गई।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 19 अगस्त को दिए अपने आदेश में मामले की लंबी न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई। पीठ ने इस देरी को ‘न्यायिक व्यवस्था की विफलता’ करार देते हुए कहा कि अपराध के बाद दोषसिद्धि तक पहुंचने में लंबा समय लगा और इसके बाद अपील के निपटारे में भी दो दशक से अधिक का वक्त लग गया।
1981 में हुई थी दो लोगों की हत्या
मामला दुमका जिले में 18 अक्टूबर 1981 को हुई दो लोगों की हत्या का है। इस मामले में पुलिस ने कुल छह लोगों को आरोपी बनाया था। हालांकि मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ने से पहले ही दो आरोपियों की मौत हो गई। इसके बाद निचली अदालत में चार आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई और उन्हें दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
निचली अदालत का फैसला वर्ष 2002 में आया। इसके बाद दोषियों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया और सजा के खिलाफ अपील दायर की। लेकिन इस अपील का निपटारा होने में करीब 22 साल लग गए।
22 साल बाद हाईकोर्ट ने बरकरार रखी सजा
झारखंड हाईकोर्ट ने 28 अक्टूबर 2024 को चारों दोषियों की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। हालांकि तब तक चार दोषियों में से तीन की मौत हो चुकी थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामले में केवल साइमन सोरेन ही जीवित बचा था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद साइमन सोरेन को हिरासत में आत्मसमर्पण करना पड़ा। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और अपनी उम्र, स्वास्थ्य तथा लंबे समय से चली आ रही न्यायिक प्रक्रिया का हवाला देते हुए राहत की मांग की।
उम्र और कई बीमारियों का हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साइमन सोरेन की उम्र करीब 70 वर्ष होने और उसके कई बीमारियों से पीड़ित होने का उल्लेख किया। अदालत के मुताबिक, उसने अब तक कुल 2 साल, 4 महीने और 12 दिन हिरासत में बिताए हैं। वर्तमान में वह हिरासत में रहते हुए अस्पताल में उपचार करा रहा है। पीठ ने माना कि मामला दोहरे हत्याकांड जैसे गंभीर अपराध से जुड़ा है, लेकिन पिछले करीब 45 वर्षों के दौरान आरोपी को जिस लंबी न्यायिक प्रक्रिया और पीड़ा से गुजरना पड़ा, उसे भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने बताई न्यायिक व्यवस्था की विफलता
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई में हुई असाधारण देरी को गंभीरता से लिया। अदालत ने कहा कि अपराध के बाद दोषसिद्धि तक पहुंचने में काफी लंबा समय लगा और उसके बाद अपील के निपटारे में भी 20 साल से ज्यादा का वक्त लग गया। पीठ ने इस स्थिति को न्यायिक व्यवस्था की विफलता बताया।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि अपील के लंबित रहने के दौरान चार दोषियों में से तीन की मौत हो गई। यानी जिन लोगों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी, उनमें से अधिकांश अपनी अपील पर अंतिम फैसला सुनने से पहले ही दुनिया छोड़ गए।
सजा निलंबित, तत्काल रिहाई का आदेश
इन परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साइमन सोरेन की उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया। हालांकि अदालत ने रिहाई को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी है।
साइमन सोरेन को निजी जमानत देनी होगी और जमानत पर रहने के दौरान वह किसी नए अपराध में शामिल नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद करीब 45 साल पुराने इस मामले में जीवित बचे दोषी को बड़ी राहत मिली है।




