
पटना: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से जुड़े विवादित बयान के बाद प्रतियोगी अभ्यर्थियों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। छात्रों के कथित अपमान के विरोध में अब पटना में एक अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया गया है। प्रदर्शनकारी लवली कुमारी ने ‘कुत्ता जनता पार्टी’ नाम से एक नया मोर्चा शुरू करने का ऐलान किया है।
लवली कुमारी हाथ में बैनर लेकर पटना की सड़कों पर प्रदर्शन करती नजर आईं। बैनर पर ‘छात्र अपमान नहीं, सम्मान’ का नारा लिखा था। इसके साथ ही BPSC पर अभ्यर्थियों की तुलना कुत्ते से किए जाने का आरोप लगाते हुए विरोध दर्ज कराया गया। बैनर में कुत्ते की तस्वीर भी लगाई गई थी।
विवादित टिप्पणी के बाद बढ़ा आक्रोश
दरअसल, BPSC की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह की कथित टिप्पणी को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी फैल गई। छात्रों का आरोप है कि रोजगार और परीक्षा से जुड़े मुद्दे उठाने वाले युवाओं के प्रति आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उनके सम्मान और आत्मसम्मान को ठेस पहुंची।
इसी के विरोध में लवली कुमारी ने ‘कुत्ता जनता पार्टी’ के गठन की घोषणा की। उनका कहना है कि यह नाम छात्रों के अपमान के विरोध का प्रतीक है और इसका उद्देश्य युवाओं की आवाज को सामने लाना है।
‘हम कुत्ते नहीं, देश का भविष्य हैं’
प्रदर्शन के दौरान लवली कुमारी ने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर शिक्षक, अधिकारी तथा अन्य जिम्मेदार पदों पर पहुंचने का सपना देखते हैं। ऐसे में अधिकारियों की ओर से छात्रों के लिए अपमानजनक टिप्पणी किया जाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने दावा किया कि नया मोर्चा आगे बिहार के अलग-अलग हिस्सों में जाकर छात्रों और युवाओं के सम्मान से जुड़े मुद्दे उठाएगा। बैनर पर अन्य अभ्यर्थियों को इससे जुड़ने के लिए स्कैनर भी लगाया गया है।
निलंबन के बावजूद शांत नहीं हुआ विरोध
विवाद के बाद सरकार की ओर से संबंधित परीक्षा नियंत्रक को निलंबित किए जाने की कार्रवाई भी की गई है। हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल निलंबन कर देने से छात्रों को हुई कथित बेइज्जती खत्म नहीं हो जाती।
लवली कुमारी का कहना है कि छात्रों को सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि सम्मान चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक अभ्यर्थियों के सम्मान और अधिकार से जुड़े सवालों का समाधान नहीं होता, तब तक विरोध जारी रहेगा।
BPSC विवाद अब महज परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं दिख रहा है। अभ्यर्थियों ने इसे सम्मान और गरिमा का मुद्दा बना दिया है और इसी के जरिए सरकार तथा आयोग के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।






