
काठमांडू: नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास अचानक आई भीषण बाढ़ और मलबे के सैलाब ने भारी तबाही मचा दी है। पानी, पत्थर और कीचड़ के तेज बहाव ने कई इलाकों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। अब तक 160 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। नेपाल में 157 और तिब्बत में 3 लोगों की जान गई, जबकि 1000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।
नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियां उफान पर हैं। बाढ़ के तेज बहाव ने सड़कों, घरों, वाहनों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। संपर्क व्यवस्था को भी बड़ा झटका लगा है। जानकारी के अनुसार, 35 पक्के पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। साथ ही 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह हो गए। बाढ़ के खौफनाक वेग ने नुवाकोट को चीन के बॉर्डर से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी अहम सड़क को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इसके बह जाने से न सिर्फ रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कतें आ रही हैं बल्कि सीमा पार व्यापार और आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है।
कई इलाकों में हालात ऐसे हैं कि राहत और बचाव दलों के लिए प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना भी चुनौती बना हुआ है। बाढ़ का पानी अपने साथ भारी मात्रा में मलबा लेकर नीचे की ओर बढ़ा, जिससे रास्ते में आने वाली कई संरचनाएं तबाह हो गईं।
कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?
26 अगस्त की सुबह नेपाल-चीन सीमा के पास अचानक पानी और मलबे का जबरदस्त सैलाब आया। शुरुआत में इस घटना को भूकंप से जोड़कर देखा गया, लेकिन बाद के आकलनों में इसके पीछे बड़े पैमाने पर लैंडस्लाइड को प्रमुख वजह माना गया।
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के आकलन के मुताबिक पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसकने से ऐसा शक्तिशाली झटका पैदा हुआ, जिससे करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा सीस्मिक सिग्नल दर्ज हुआ। हालांकि इसे सामान्य भूकंप नहीं माना गया।
बताया जा रहा है कि ग्लेशियर और चट्टानों का बड़ा हिस्सा ल्हेन्डे खोला में गिरा। इसके बाद पानी, बर्फ, पत्थर और कीचड़ का विशाल मलबा तेजी से नीचे की ओर आया। ल्हेन्डे खोला आगे जाकर भोटेकोशी नदी से जुड़ता है। इसके बाद तेज बहाव ने दूसरे नदी तंत्रों को प्रभावित किया और तबाही का दायरा बढ़ता चला गया।
30 फीट तक ऊपर उठा पानी, 150 किलोमीटर दूर तक पहुंचा मलबा
सैलाब की रफ्तार इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने या सुरक्षित स्थानों पर जाने का पर्याप्त समय तक नहीं मिल सका। कई जगह पानी करीब 30 फीट तक ऊपर उठने की जानकारी सामने आई है।
बाढ़ अपने साथ भारी मलबा, वाहन और अन्य सामान बहाकर करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक ले गई। चितवन में भी बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। अधिकारियों की ओर से जारी किए गए अपडेट के साथ मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में बदलाव भी देखने को मिला है।
एक सरकारी अपडेट में 157 शव मिलने की जानकारी दी गई थी, जबकि बाद की व्यापक रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 160 तक पहुंचने की बात सामने आई है।
लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक
1000 से ज्यादा लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है।लापता लोगों को लेकर भी अलग-अलग चरणों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। सरकारी विवरण में 403 लोगों के संपर्क में नहीं होने की जानकारी दी गई, जिनमें 341 विदेशी और 62 नेपाली नागरिक बताए गए।
विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। जानकारी के अनुसार 133 भारतीय नागरिक लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 37 भारतीय मूल के एनआरआई के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। कुल मिलाकर कम से कम 25 देशों के नागरिक इस आपदा से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे तीर्थयात्री भी प्रभावित
बाढ़ का असर कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे लोगों पर भी पड़ा है। ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों से संपर्क टूटने की जानकारी सामने आई है। फाउंडेशन के अनुसार, समूह ने तिब्बती इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। सुबह करीब 9:05 बजे समूह के लीडर प्रवीण से आखिरी बार संपर्क हुआ था। इसके लगभग 10 मिनट बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका। इस घटना ने तीर्थयात्रियों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। राहत एवं बचाव एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों का पता लगाने में जुटी हैं।
चीनी सीमा से सटे इलाके टिमुरे में तैनात 23 जवानों में से 10 जवान लापता हैं। इसी तरह, रसुवागढी पुलिस चौकी के 9 जवानों में से महज एक जवान सुरक्षित मिला है और आठ अन्य का सुराग नहीं लग सका है।
रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन
नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। रातभर 11 सर्च और रेस्क्यू टीमें अलग-अलग प्रभावित इलाकों में तैनात रहीं। हेलिकॉप्टर की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं, मलबे और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश भी जारी है।
नुवाकोट में राहत अभियान के दौरान एक व्यक्ति को खुदाई करने वाली मशीन की मदद से जिंदा बाहर निकाला गया, जिससे बचाव दलों को उम्मीद मिली है कि मलबे में अब भी लोग जीवित हो सकते हैं।
भारत पर भी मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
इस प्राकृतिक आपदा का असर नेपाल तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। नेपाल से भारत की ओर आने वाले नदी तंत्रों में जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश में भी अलर्ट जारी किया गया है।
नेपाल में आई इस भीषण आपदा का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों में पड़ने की आशंका है। नेपाल से निकलने वाला पानी त्रिशूली नदी के रास्ते भारत की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में बिहार और उत्तर प्रदेश के नदी किनारे बसे इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है।
विशेष रूप से गंडक, नारायणी और कोसी नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। नेपाल से आने वाले पानी की मात्रा बढ़ने पर भारत के सीमावर्ती और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
फिलहाल नेपाल में बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने और कई इलाकों के संपर्क से कट जाने के कारण आने वाले समय में मृतकों और प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।







