
नई दिल्ली: भारत में अब कानूनी, प्रशासनिक, व्यावसायिक और डिजिटल गतिविधियों के लिए भारतीय मानक समय (IST) को एक समान आधिकारिक समय-संदर्भ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) रूल्स, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। ये नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन के 180 दिन बाद प्रभावी होंगे। इस हिसाब से इनका क्रियान्वयन मार्च 2027 के आसपास शुरू होने की उम्मीद है।
नए नियम लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 की धारा 52 के तहत बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य देशभर में भारतीय मानक समय के निर्माण, रखरखाव, प्रसार, समकालिकरण, प्रमाणिकता और उपयोग के लिए एक समान व्यवस्था तैयार करना है। सरकार ने इसे प्रशासन, वाणिज्य, उद्योग, महत्वपूर्ण अवसंरचना और डिजिटल सेवाओं में सटीक एवं विश्वसनीय समय व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
नियम लागू होने के बाद कानूनी, प्रशासनिक और आधिकारिक दस्तावेजों में समय का उल्लेख भारतीय मानक समय के अनुसार करना होगा, जब तक किसी विशेष परिस्थिति में अलग व्यवस्था स्पष्ट रूप से स्वीकृत न हो। इसके साथ ही वाणिज्य, परिवहन, सार्वजनिक प्रशासन, कानूनी अनुबंध और वित्तीय गतिविधियों में भी IST को मानक समय-संदर्भ बनाया गया है।
नियमों के अनुसार आधिकारिक या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए IST के अलावा किसी अन्य समय-संदर्भ का उपयोग, प्रदर्शन या अभिलेखन प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि, निर्धारित परिस्थितियों में विदेशी समय क्षेत्र का स्पष्ट उल्लेख किया जा सकेगा। वैज्ञानिक अनुसंधान, नौवहन और खगोल विज्ञान जैसे विशिष्ट क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक समय-मानों की अनुमति निर्धारित प्रावधानों के तहत दी जा सकती है।
भारत की प्राथमिक समय-मान प्रणाली का रखरखाव सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) करेगी। नियमों में भारतीय मानक समय को UTC(NPLI) से संबद्ध बताया गया है और यह समन्वित सार्वभौमिक समय (UTC) से जुड़ी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित व्यवस्था पर आधारित होगा।
भारतीय मानक समय UTC से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। देशभर में इसके प्रसार के लिए राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशालाएं (RRSL), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) तथा अन्य अधिकृत समय-स्रोत भूमिका निभा सकेंगे।
नए नियमों में महत्वपूर्ण क्षेत्रों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। दूरसंचार, वित्तीय सेवाओं, ऊर्जा क्षेत्र और डेटा केंद्रों जैसी महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं में समय-निर्भर प्रणालियों को अधिकृत और IST से प्रमाणिक रूप से जुड़े समय-स्रोत के साथ समकालिक करना होगा।
इसके लिए नेटवर्क टाइम प्रोटोकॉल (NTP) और प्रिसीजन टाइम प्रोटोकॉल (PTP) जैसे मानक तकनीकी माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है। प्रमुख सार्वजनिक स्थानों, जैसे रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे और सरकारी कार्यालयों में भी प्रमाणिक स्रोत से समकालिक भारतीय मानक समय प्रदर्शित करने का प्रावधान किया गया है।
इन नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल घड़ियों को एक समय पर मिलाना नहीं, बल्कि पूरे समय-सिंक्रीकरण तंत्र को साइबर हमलों के प्रति सुरक्षित और मजबूत बनाना है। नियमों के तहत समय-सिंक्रीकरण प्रणालियों में मजबूत साइबर सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे। संस्थाओं को ऐसी वैकल्पिक और दोहरी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे किसी एक समय-स्रोत के बाधित होने पर भी आवश्यक सेवाएं जारी रह सकें।
सरकार ने विशेष रूप से जैमिंग, स्पूफिंग और साइबर हमलों से उत्पन्न संभावित व्यवधानों से निपटने के लिए आकस्मिक योजना तैयार करने पर जोर दिया है। यदि मुख्य समय-स्रोत से संकेत मिलना बंद हो जाए, तो निर्बाध समय-सेवा बनाए रखने के लिए अत्यधिक स्थिर और सटीक परमाणु घड़ियों या अन्य अधिकृत समय-स्रोतों का सहारा लिया जा सकेगा।
आज बैंकिंग, दूरसंचार, बिजली ग्रिड, डिजिटल लेन-देन, उपग्रह आधारित सेवाओं और अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रणालियों में समय की अत्यंत सूक्ष्म सटीकता जरूरी है। कुछ डिजिटल और औद्योगिक प्रणालियां मिलीसेकंड से लेकर माइक्रोसेकंड स्तर तक के समय-सामंजस्य पर निर्भर करती हैं।
सरकार की ‘वन नेशन, वन टाइम’ पहल का उद्देश्य इसी आवश्यकता को देखते हुए देशभर में एक विश्वसनीय और प्रमाणिक समय-संदर्भ उपलब्ध कराना है। सरकार पहले ही राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला और इसरो के सहयोग से भारतीय मानक समय के मिलीसेकंड से माइक्रोसेकंड स्तर तक प्रसार की तकनीकी व्यवस्था विकसित कर रही है। जुलाई 2026 में बेंगलुरु में व्हाइट रैबिट तकनीक आधारित IST प्रसार प्रदर्शन नेटवर्क भी शुरू किया गया था।
नियमों के पालन की निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी विधिक मापविज्ञान प्रभाग पर होगी। अधिकृत समय-स्रोतों और संबंधित प्रणालियों का समय-समय पर परीक्षण और लेखा-परीक्षण किया जा सकेगा। नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या संस्था के खिलाफ लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 के तहत दंडात्मक कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है। जांच और दंड की कार्रवाई निर्धारित प्राधिकारी द्वारा की जाएगी।
यह पहल केवल घड़ियों को एक समय पर सेट करने तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य भारत में डिजिटल प्रणालियों, वित्तीय लेन-देन, संचार नेटवर्क और महत्वपूर्ण अवसंरचना के लिए एक विश्वसनीय, प्रमाणिक और सुरक्षित राष्ट्रीय समय-संदर्भ तैयार करना है।
सरकार ने समय को आधुनिक डिजिटल अवसंरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए उसकी प्रमाणिकता, पता लगाने योग्य शुद्धता (ट्रेसेबिलिटी), निरंतरता और साइबर सुरक्षा को नियमों का हिस्सा बनाया है। इससे भविष्य में डिजिटल लेन-देन, साइबर अपराध की जांच, संचार नेटवर्क, परिवहन और महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रणालियों में समय संबंधी विसंगतियों को कम करने में मदद मिलेगी।






