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Abhinandan Varthaman: भारतीय वायुसेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन और ‘वीर चक्र’ से सम्मानित अभिनंदन वर्धमान ने वायुसेना में करीब 22 साल की सेवा के बाद अब नागरिक उड्डयन क्षेत्र का रुख किया है। वर्ष 2019 में पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमान को मिग-21 बाइसन से मार गिराने के बाद देशभर में चर्चित हुए अभिनंदन अब गोवा स्थित क्षेत्रीय एयरलाइन ‘FLY91’ से बतौर कमर्शियल पायलट जुड़ गए हैं।
बताया जा रहा है कि अभिनंदन ने अगस्त में ‘FLY91’ में पायलट के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, उन्होंने भारतीय वायुसेना से विदाई लेने का फैसला क्यों किया, इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
अभिनंदन वर्धमान ने भारतीय वायुसेना में लगभग 22 वर्षों तक सेवाएं दीं। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। अब वायुसेना की वर्दी छोड़कर वह यात्री विमानों के कमर्शियल पायलट के रूप में अपने करियर की नई पारी शुरू कर रहे हैं।
फरवरी 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी। इसके अगले दिन पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के इरादे से लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया। पाकिस्तानी विमानों को खदेड़ने के लिए भारतीय वायुसेना ने भी अपने लड़ाकू विमान भेजे थे।
इसी दौरान तत्कालीन विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान मिग-21 बाइसन लेकर पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों का पीछा कर रहे थे। हवाई मुठभेड़ के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया। हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान उनका मिग-21 भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
मिग-21 के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद अभिनंदन पैराशूट के जरिए नीचे उतरे, लेकिन वह पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में जा गिरे। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
अभिनंदन की गिरफ्तारी के बाद भारत ने उनकी सुरक्षित वापसी के लिए पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाया। करीब तीन दिन तक हिरासत में रहने के बाद पाकिस्तान ने उन्हें 1 मार्च 2019 की रात अटारी-वाघा सीमा के रास्ते भारत को सौंप दिया। उनकी वापसी के बाद देशभर में उनका जोरदार स्वागत हुआ और वह भारतीय वायुसेना के साहस एवं दृढ़ता के प्रतीक बन गए।
2019 के हवाई संघर्ष में उनके अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए भारत सरकार ने अभिनंदन वर्धमान को ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किया। यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है।







