
श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने करीब आठ महीने के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर अंतरिक्ष में अपनी ताकत का दमदार प्रदर्शन किया है। शुक्रवार तड़के GSLV-F17 रॉकेट ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरकर EOS-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया। इस कामयाबी के साथ भारत की अंतरिक्ष निगरानी और रणनीतिक क्षमताओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पाकिस्तान और चीन की सीमा पर रखेगा पैनी नजर
EOS-05 की सबसे खास बात इसकी जियोसिंक्रोनस कक्षा में तैनाती है। करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से यह सैटेलाइट भारत के बड़े हिस्से की लगातार निगरानी में मदद करेगा। इसकी क्षमता को देखते हुए भारत की पाकिस्तान और चीन से लगी संवेदनशील सीमाओं सहित रणनीतिक क्षेत्रों की निगरानी में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलने की उम्मीद है।
सैटेलाइट से मिलने वाला हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग और अन्य डेटा सीमा सुरक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं, पर्यावरण और कृषि से जुड़े कार्यों में भी उपयोगी साबित हो सकता है।
महज 18 मिनट में मिशन पूरा
GSLV-F17 ने शुक्रवार तड़के 2:55 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरी। यह GSLV की 19वीं उड़ान थी। प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद रॉकेट ने EOS-05 को उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया।
इस सफलता के बाद इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि GSLV के जरिए भारत ने अब तक का अपना सबसे भारी सैटेलाइट भेजा है और इसके पूरी तरह सक्रिय होने के बाद यह जियो ऑर्बिट से भारत का पहला समर्पित इमेजिंग सैटेलाइट बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बाढ़ से लेकर चक्रवात तक, लगातार मिलेगी निगरानी
EOS-05 की खास कक्षा इसे सामान्य रिमोट-सेंसिंग सैटेलाइट से अलग बनाती है। आमतौर पर ऐसे सैटेलाइट पृथ्वी से कुछ सौ किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगाते हैं और किसी इलाके के ऊपर से गुजरने के दौरान ही तस्वीरें और डेटा उपलब्ध कराते हैं।
वहीं EOS-05 जियोसिंक्रोनस कक्षा में रहकर भारत के बड़े हिस्से पर लगातार निगरानी में मदद कर सकता है। इससे बाढ़, चक्रवात, जंगलों की आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तेजी से जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी।
रणनीतिक निगरानी में भी अहम भूमिका
इस मिशन का महत्व केवल मौसम और आपदा प्रबंधन तक सीमित नहीं है। सैटेलाइट से मिलने वाला डेटा सीमा निगरानी, पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी और कृषि क्षेत्र में भी उपयोगी हो सकता है। रणनीतिक दृष्टि से देखें तो पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं जैसे संवेदनशील इलाकों पर नजर रखने की भारत की क्षमता को इससे मजबूती मिलने की उम्मीद है।
2021 की असफल कोशिश के बाद बड़ी कामयाबी
EOS-05 मिशन को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले अगस्त 2021 में इसी श्रृंखला के पहले सैटेलाइट EOS-03 (GISAT-1) को लॉन्च करने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह मिशन सफल नहीं हो पाया था।
करीब पांच साल बाद इसी दिशा में मिली यह सफलता इसरो के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। GSLV-F17 की सफल उड़ान ने न केवल लंबे लॉन्च गैप को खत्म किया है, बल्कि भारत की अंतरिक्ष आधारित निगरानी क्षमता को भी एक नई ऊंचाई दी है।



