
रांची:झारखंड की राजनीति में इन दिनों डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता जयराम कुमार महतो और पुलिस एसोसिएशन के बीच चल रहा विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इसी बीच विधायक जयराम महतो ने 2 सितंबर 2026 को झारखंड के महामहिम राज्यपाल से मुलाकात कर पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
जयराम महतो ने राज्यपाल के समक्ष पुलिस एसोसिएशन की ओर से उनके खिलाफ अपनाए जा रहे रुख को लेकर गंभीर सवाल उठाए। विधायक का आरोप है कि पुलिस एसोसिएशन उनके साथ राजनीतिक तरीके से पेश आ रही है और इस पूरे मामले को एक अलग दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्यपाल से क्या बोले जयराम महतो?
राज्यपाल से मुलाकात के दौरान जयराम महतो ने कथित तौर पर पुलिस एसोसिएशन की गतिविधियों और उनके खिलाफ लिए जा रहे रुख की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पुलिस एसोसिएशन को अपने संगठनात्मक मुद्दों और राजनीतिक गतिविधियों के बीच अंतर बनाए रखना चाहिए।
विधायक ने राज्यपाल से पूरे प्रकरण को निष्पक्ष रूप से देखने और उचित हस्तक्षेप करने की अपील की। उनका कहना है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ कोई शिकायत या मामला है तो उस पर संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, न कि संगठन के स्तर से दबाव बनाया जाना चाहिए।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, जयराम महतो और पुलिस एसोसिएशन के बीच विवाद की शुरुआत बरवाअड्डा थाना प्रभारी के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले से हुई। पुलिस एसोसिएशन का आरोप है कि 21 अगस्त की रात जयराम महतो ने बरवाअड्डा थाना प्रभारी से फोन पर कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और बाद में समर्थकों के साथ थाना परिसर में पहुंचे।
पुलिस एसोसिएशन ने इस मामले में विधायक से माफी मांगने की मांग की थी। बाद में एसोसिएशन की ओर से मामले में कानूनी कार्रवाई और विधायक की गिरफ्तारी की मांग भी उठाई गई।
वहीं, जयराम महतो ने पुलिस एसोसिएशन की मांगों को स्वीकार करने के बजाय अपना पक्ष मजबूती से रखा है। उन्होंने कहा है कि वे किसी दबाव से पीछे हटने वाले नहीं हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
पुलिस एसोसिएशन ने आंदोलन का भी किया ऐलान
विवाद के बीच झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने नौ सूत्री मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। रिपोर्टों के अनुसार, एसोसिएशन ने 8 सितंबर से 11 सितंबर तक काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी, 19 सितंबर को सामूहिक उपवास, 24 सितंबर को धरना और 5 से 10 अक्टूबर तक सामूहिक अवकाश जैसे कार्यक्रम घोषित किए हैं।
एसोसिएशन की मांगों में पुलिसकर्मियों के विभिन्न भत्तों में सुधार, लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापित कर्मियों के तबादले और पदोन्नति समेत अन्य मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, जयराम महतो से जुड़े विवाद ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक और प्रशासनिक तौर पर अधिक संवेदनशील बना दिया है।
जयराम महतो ने क्यों मांगा राज्यपाल का हस्तक्षेप?
राज्यपाल से मुलाकात के पीछे विधायक का मुख्य उद्देश्य पूरे मामले में निष्पक्षता सुनिश्चित कराने की मांग के तौर पर देखा जा रहा है। जयराम महतो का आरोप है कि पुलिस एसोसिएशन उनके खिलाफ संगठनात्मक शक्ति का इस्तेमाल कर रही है और मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से समीक्षा हो और किसी भी पक्ष के साथ भेदभाव न हो।
विवाद के आगे बढ़ने के संकेत
जयराम महतो और पुलिस एसोसिएशन के बीच बढ़ता विवाद आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण हो सकता है। एक ओर पुलिस एसोसिएशन ने आंदोलन की घोषणा की है, वहीं दूसरी ओर विधायक ने भी अपने रुख में नरमी के संकेत नहीं दिए हैं।
ऐसे में अब निगाहें सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। राज्यपाल से मुलाकात के बाद यह देखना अहम होगा कि सरकार इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है और पुलिस एसोसिएशन तथा विधायक के बीच चल रहे टकराव का समाधान किस तरह निकाला जाता है।
फिलहाल दोनों पक्षों के अपने-अपने आरोप और दावे हैं। मामले में अंतिम स्थिति संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगी।



