
रांची: झारखंड की राजनीति में एक दुखद संयोग एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यकाल के दौरान पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों में शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो चुका है।
जगरनाथ महतो
डुमरी विधायक जगरनाथ महतो हेमंत सोरेन सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे। कोरोना संक्रमण के बाद उनकी तबीयत गंभीर हुई थी। लंबे समय तक उनका इलाज चला और उन्हें फेफड़े का ट्रांसप्लांट भी कराना पड़ा। हालांकि, 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
जगरनाथ महतो को झारखंड की राजनीति में जमीनी पकड़ रखने वाले मजबूत नेताओं में गिना जाता था। उनके निधन के बाद डुमरी विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें उनकी पत्नी बेबी देवी ने जीत दर्ज की और विधानसभा पहुंचीं।
रामदास सोरेन
वर्ष 2025 में हेमंत सोरेन सरकार को एक और बड़ा झटका लगा। घाटशिला से विधायक रामदास सोरेन का 15 अगस्त 2025 को निधन हो गया। वह हेमंत सोरेन सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
इस तरह जगरनाथ महतो के निधन से एक बार फिर शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सरकार के एक मंत्री का निधन हुआ। रामदास सोरेन के निधन ने झारखंड की राजनीति और खासकर झामुमो को गहरी क्षति पहुंचाई।
सुदिव्य कुमार सोनू
साल 2026 में यह दुखद सिलसिला एक बार फिर चर्चा में है। आज यानी रविवार की सुबह गिरिडीह विधायक और झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का 56 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक से निधन हो गया।
सुदिव्य कुमार सोनू हेमंत सोरेन सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री थे। इसके साथ ही उनके पास पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य तथा नगर विकास एवं आवास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी थी।
सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर खासा संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने राजनीति की शुरुआत किसी बड़े राजनीतिक पद से नहीं, बल्कि एक सामान्य झामुमो कार्यकर्ता के तौर पर की थी।
वर्ष 1989 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की सदस्यता ली और संगठन के लिए सक्रिय रूप से काम करना शुरू किया। शुरुआती दौर में वह दीवार लेखन करते, पोस्टर लगाते और पार्टी का झंडा लेकर गांव-गांव घूमकर संगठन के लिए काम करते थे।
वर्ष 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर कमेटी का संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद पार्टी में उन्हें लगातार अलग-अलग संगठनात्मक जिम्मेदारियां मिलीं और वह झामुमो के गिरिडीह जिला अध्यक्ष के पद तक पहुंचे।
सुदिव्य कुमार सोनू के लिए चुनावी राजनीति का सफर भी आसान नहीं रहा। वर्ष 2009 में उन्होंने पहली बार गिरिडीह विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली।
इसके बाद 2014 में उन्होंने दोबारा चुनावी मैदान में उतरकर अपनी दावेदारी पेश की। इस चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रहे। हालांकि, उन्होंने राजनीतिक संघर्ष जारी रखा।
वर्ष 2019 में झामुमो ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और इस बार उन्होंने गिरिडीह विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। वर्ष 2024 में भी उन्होंने अपनी जीत बरकरार रखी और लगातार दूसरी बार विधायक बने।
इसके बाद हेमंत सोरेन सरकार में उन्हें मंत्री की जिम्मेदारी मिली। एक सामान्य पार्टी कार्यकर्ता से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर मंत्री पद तक पहुंचा, लेकिन महज 56 वर्ष की उम्र में उनके अचानक निधन के साथ यह सफर थम गया।






