
जमशेदपुर। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने झारखंड में अपने संगठन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां की जिला कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार सिंह यादव ने मंगलवार को आदेश जारी किया।
प्रदेश अध्यक्ष ने अपने इस निर्णय की जानकारी झारखंड के पार्टी प्रभारी एवं पूर्व मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव तथा राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव को भी दे दी है। दोनों जिलों में संगठनात्मक गतिविधियों और पदाधिकारियों को लेकर लंबे समय से उठ रहे विवादों के बीच प्रदेश नेतृत्व के इस कदम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जिलाध्यक्षों के चयन के बाद से ही उठ रहे थे सवाल
पूर्वी सिंहभूम में शंभू चौधरी और सरायकेला-खरसावां में बैजू यादव को जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही संगठन के भीतर मतभेद की चर्चाएं सामने आती रही थीं। हाल की घटनाओं ने इन विवादों को और हवा दे दी। इसके बाद प्रदेश नेतृत्व ने जिला कमेटियों को ही भंग करने का निर्णय लिया।
युवा मोर्चा के पद को लेकर पूर्वी सिंहभूम में बढ़ा विवाद
पूर्वी सिंहभूम में विवाद की प्रमुख वजह युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष के मनोनयन को लेकर सामने आई। जानकारी के मुताबिक राजद युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रंजन यादव ने कमलेश यादव को युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष मनोनीत किया था।
इसी बीच पूर्वी सिंहभूम के जिलाध्यक्ष शंभू चौधरी ने अपने अधिकार क्षेत्र का हवाला देते हुए नवीन कुमार को युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष मनोनीत कर दिया। दो अलग-अलग मनोनयन सामने आने के बाद मामला पार्टी के भीतर विवाद का विषय बन गया। बताया जाता है कि युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रंजन यादव ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप मानते हुए प्रदेश नेतृत्व के समक्ष शिकायत की थी।
सरायकेला में भी संगठन के भीतर खींचतान
वहीं, सरायकेला-खरसावां जिले में भी पार्टी के पदाधिकारियों के बीच मतभेद की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार जिलाध्यक्ष बैजू यादव और राजद बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष जनार्दन कुमार के बीच विवाद की स्थिति बनी थी। इस मामले को लेकर आरआईटी थाना में लिखित शिकायत दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
कार्यकर्ताओं ने फैसले को बताया जरूरी कदम
दोनों जिलों की कमेटियों को भंग किए जाने के बाद अब पार्टी के भीतर नए सिरे से संगठन खड़ा करने की तैयारी मानी जा रही है। कई कार्यकर्ता प्रदेश नेतृत्व के इस फैसले को संगठन में लंबे समय से चल रहे विवादों को खत्म करने की दिशा में उठाया गया जरूरी कदम बता रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पार्टी इन दोनों जिलों में नई कमेटी और नए जिलाध्यक्षों को लेकर क्या फैसला करती है।





