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बांकुड़ा: पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। बुधवार को भाकपा (माओवादी) के तीन नेताओं ने पुलिस के सामने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में दो महिलाएं शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, तीनों लंबे समय से माओवादी गतिविधियों से जुड़े हुए थे और झारखंड समेत पश्चिम बंगाल के कई जिलों में सक्रिय रहे हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की पहचान रीजनल कमेटी सदस्य रामप्रसाद मंडी उर्फ महादेव उर्फ सचिन, जोनल कमेटी सदस्य जबा महतो उर्फ बुलु उर्फ गोरी और नयनतारा साहू उर्फ मिता उर्फ झूमा के रूप में हुई है।
दो INSAS, एक AK-47 और 154 राउंड गोलियां सौंपी
पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण के दौरान तीनों ने अपने पास मौजूद हथियार और गोला-बारूद भी जमा कराया। पुलिस के मुताबिक, उनके कब्जे से दो INSAS राइफल, एक AK-47 राइफल, 10 मैगजीन और 154 राउंड गोलियां बरामद की गई हैं।
तीनों ने बंगाल पुलिस के एडीजी (पश्चिमी क्षेत्र) आनंद कुमार और बांकुड़ा के पुलिस अधीक्षक पीवीजी सतीश की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया।
दो दशक से माओवादी गतिविधियों में थे सक्रिय
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले तीनों माओवादी करीब दो दशक से संगठन की गतिविधियों से जुड़े हुए थे। उनके खिलाफ हत्या, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA तथा आर्म्स एंड एक्सप्लोसिव्स एक्ट समेत 80 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने की बात पुलिस ने कही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ये तीनों पश्चिम बंगाल के झारग्राम, बांकुड़ा, पुरुलिया और पश्चिम मेदिनीपुर के अलावा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के कोल्हान क्षेत्र में भी माओवादी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं।
पति की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा दबाव
पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाली माओवादी नेता जबा महतो उर्फ बुलु के पति मदन महतो को सरायकेला पुलिस ने 4 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा बांकुड़ा और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बीच माओवादी संगठन पर दबाव बढ़ता जा रहा था।
पुलिस का कहना है कि लगातार अभियान और संगठन पर बढ़ते दबाव के बीच तीनों ने माओवादी संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास नीति का मिलेगा लाभ
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले तीनों लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्हें राज्य सरकार की आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति के तहत उपलब्ध सुविधाओं और पुनर्वास प्रक्रिया का लाभ दिया जाएगा।
पुलिस का कहना है कि इस तरह के आत्मसमर्पण से इलाके में माओवादी गतिविधियों पर कार्रवाई को मजबूती मिलेगी और लंबे समय से संगठन से जुड़े लोगों के मुख्यधारा में लौटने का रास्ता भी खुलेगा।






