
SIR विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी का बड़ा ऐलान, अभिजीत दीपके बोले- मांग नहीं मानी तो होगा ‘जंतर-मंतर 2.0’
नई दिल्ली। चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिस तरह राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा बीजेपी से मिलकर वोट चोरी, चुनाव में धांधली आदि का आरोप लगाकर मांग रहे हैं।ठीक उन्हीं के सुर में अभिजीत दीपिका भी और में सुर मिलाने लगे हैं।cjp पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CEC से 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने की मांग की।
दीपके ने कहा कि यदि निर्धारित समय में इस्तीफा नहीं दिया गया तो उनकी पार्टी देशभर में विरोध-प्रदर्शन शुरू करेगी। उन्होंने प्रस्तावित आंदोलन को ‘जंतर-मंतर 2.0’ नाम दिया है।
SIR को लेकर बढ़ा विवाद
CJP का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर कथित मतभेदों की रिपोर्ट के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों तथा प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठाए जाने का उल्लेख है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक पिछले एक साल में लिए गए SIR समेत सभी प्रमुख फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
मतदाता सूची में नाम हटाने पर CJP के आरोप
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक इस प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और इससे मतदान के अधिकार को लेकर चिंता पैदा हुई है।
हालांकि, ये CJP और अन्य आलोचकों द्वारा लगाए गए आरोप हैं। इन्हें चुनाव आयोग की ओर से स्वीकार किया गया तथ्य नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग ने SIR की प्रक्रिया और अपने फैसलों का बचाव करते हुए कहा है कि अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग की मंजूरी के बाद लिए गए हैं।
48 घंटे बाद आंदोलन की चेतावनी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपके ने कहा कि CEC यदि 48 घंटे के भीतर पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो CJP देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी की ओर से इसे ‘जंतर-मंतर 2.0’ के तौर पर पेश किया गया है।
CJP ने चुनाव आयोग से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर भी सवाल उठाए हैं और आयोग की कार्यप्रणाली में बदलाव की मांग की है।
विवाद के केंद्र में चुनाव आयोग की भूमिका
SIR विवाद अब केवल मतदाता सूची के संशोधन तक सीमित नहीं रह गया है। चुनाव आयोग के भीतर दर्ज कथित आपत्तियों, चुनावी डेटा के प्रबंधन और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी सार्वजनिक बहस तेज हुई है।
एक ओर द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों का विवरण सामने आया है, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि अलग-अलग सुझाव और टिप्पणियां संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए हैं।
अब CJP के 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद इस पूरे विवाद में आगे क्या कदम उठते हैं, इस पर नजर बनी हुई है।






