
पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर की मौजूदगी में कल्याणपुर स्थित आवास पर हुई वापसी,गढ़वा की सियासत में शुरू हुई नई चर्चा
आकाश लोहार
गढ़वा
राजनीति की राह में कभी कदम आगे बढ़ते हैं,तो कभी वक्त इंसान को फिर उसी मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है,जहां से सफर की शुरुआत हुई थी,सियासत में दल बदलना कोई नई बात नहीं,लेकिन जब कोई चेहरा अपने पुराने राजनीतिक घर में लौटता है,तो उस वापसी के पीछे की कहानी और उसके मायने चर्चा का विषय बन जाते हैं,गढ़वा की राजनीति में आज एक ऐसा ही घटनाक्रम सामने आया,जब राजद के माने जाने वाले करीब अंसारी ने एक बार फिर झारखंड मुक्ति मोर्चा का दामन थाम लिया,उनकी इस वापसी के साथ जिले के राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा शुरू हो गई है।
पूर्व मंत्री एवं झामुमो के वरिष्ठ नेता मिथिलेश कुमार ठाकुर की मौजूदगी में आज कल्याणपुर स्थित उनके आवास पर करीब अंसारी की झामुमो में वापसी हुई,इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर गढ़वा की बदलती सियासत में पुराने राजनीतिक रिश्ते किस तरह नए समीकरणों का रूप ले रहे हैं।
करीब अंसारी को राजद के करीब माना जाता रहा है,ऐसे में उनका एक बार फिर झामुमो के साथ जुड़ना राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है,हालांकि,उनकी इस वापसी के पीछे की परिस्थितियों और फैसले के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है,लेकिन उनके इस कदम ने राजनीतिक चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।
राजनीति केवल पद और पार्टी का नाम नहीं,बल्कि विचारों,संबंधों और विश्वास के साथ आगे बढ़ने का भी एक सफर है,इस सफर में कभी दूरियां बनती हैं,तो कभी पुराने रास्ते फिर एक-दूसरे से आ मिलते हैं,करीब अंसारी की झामुमो में वापसी को भी इसी राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है,अब यह आने वाला वक्त बताएगा कि उनकी यह वापसी गढ़वा की राजनीति में क्या भूमिका निभाती है और झामुमो के साथ उनका आगे का सफर किस दिशा में बढ़ता है।
गढ़वा की सियासत में हर राजनीतिक घटनाक्रम अपने साथ कई सवाल और संभावनाएं लेकर आता है,करीब अंसारी की घर वापसी भी उन्हीं घटनाक्रमों में से एक है,जिस पर आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चाएं जारी रह सकती हैं।f
फिलहाल,इतना तय है कि करीब अंसारी ने एक बार फिर झामुमो का दामन थामकर अपनी राजनीतिक राह को नया मोड़ दिया है,कल्याणपुर स्थित आवास पर हुई इस वापसी के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर रहेंगी कि उनका यह फैसला आने वाले समय में गढ़वा के राजनीतिक परिदृश्य में क्या बदलाव लेकर आता है।




