
जमशेदपुर: लौहनगरी की सियासत ने बुधवार दोपहर अपने सबसे पुराने और मजबूत स्तंभों में से एक को अचानक खो दिया। जमशेदपुर महानगर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष 78 वर्षीय चंद्रशेखर मिश्रा अब इस दुनिया में नहीं रहे। नियति का क्रूर खेल देखिए कि जिस वक्त वे छायानगर में एक जनहित के काम—शिलान्यास समारोह—की गवाही बनने के लिए तैयार होकर अपने कदम घर से बाहर निकाल रहे थे, ठीक उसी पल काल ने उन्हें घेर लिया। अचानक सीने में उठे तेज दर्द के साथ वे गिर पड़े और जब तक टाटा मोटर्स अस्पताल की इमरजेंसी तक पहुंचाया जाता, उनकी सांसों की डोर टूट चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिल का दौरा पड़ने की पुष्टि की।
संगठन का मजबूत सिपाही अचानक हुआ रुखसत
78 वर्ष की उम्र में भी दलगत राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में युवाओं जैसा जज्बा रखने वाले चंद्रशेखर मिश्रा की यह विदाई पूरे शहर को सन्न कर गई। बुधवार दोपहर तक जो नेता कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय रहने की योजना बना रहा था, उसके यूं एकाएक चले जाने की खबर जंगल में आग की तरह फैली। देखते ही देखते टाटा मोटर्स अस्पताल का परिसर भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और तमाम दलों के वरिष्ठ नेताओं से भर गया।
पक्ष-विपक्ष की सीमाएं टूटीं, अस्पताल पहुंचे दिग्गजों की आंखें नम
मिश्रा के निधन की खबर मिलते ही जमशेदपुर से लेकर रांची तक राजनीतिक शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसे अपनी निजी क्षति बताते हुए कहा कि उन्होंने संगठन का एक सच्चा मार्गदर्शक और भाई खो दिया है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने इस आकस्मिक विछोह पर स्तब्धता जाहिर करते हुए कहा कि पार्टी ने जमीन से जुड़ा निष्ठावान सिपाही खो दिया है।
अस्पताल पहुंचे नेताओं में:
सांसद विद्युत वरण महतो
जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा दास साहू
जेडी(यू) विधायक सरयू राय
जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा
सहित कई प्रमुख हस्तियों ने पहुंचकर पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए और शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। दलगत सीमाओं से परे नेताओं का जुटना इस बात की गवाही दे रहा था कि चंद्रशेखर मिश्रा ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में केवल संगठन नहीं, बल्कि रिश्तों की भी एक मजबूत पूंजी कमाई थी।



