
संत पाल स्कूल के कक्षा नौ का टॉपर था सार्थक तिवारी,परिवार प्यार से बुलाता था केशव
आकाश लोहार
गढ़वा
कुछ सपने आंखों में पलते हैं,कुछ उम्मीदें परिवार के दिलों में सजती हैं और कुछ बच्चे अपनी प्रतिभा से पूरे समाज का भविष्य रोशन करने की उम्मीद जगाते हैं,लेकिन जब उम्र के उस पड़ाव पर,जहां जिंदगी की उड़ान शुरू होती है,कोई होनहार अचानक हमेशा के लिए साथ छोड़ जाए,तो सिर्फ एक परिवार नहीं,बल्कि पूरा समाज भीतर तक टूट जाता है,गढ़वा में भी कुछ ऐसा ही दर्दनाक मंजर देखने को मिला,जब संत पाल स्कूल के कक्षा नौ के टॉपर और होनहार विद्यार्थी सार्थक तिवारी उर्फ केशव के असामयिक निधन की खबर सामने आई,जिस बच्चे की प्रतिभा पर विद्यालय को गर्व था,जिसके उज्ज्वल भविष्य के सपने उसके माता पिता और परिजनों ने संजो रखे थे,आज वही बच्चा सबकी आंखों में आंसू और दिलों में कभी न भरने वाला खालीपन छोड़ गया।
केशव के निधन की खबर से संत पाल स्कूल के शिक्षक,विद्यार्थी और विद्यालय परिवार गहरे सदमे में हैं,विद्यालय में उसकी प्रतिभा,पढ़ाई के प्रति लगन,तेजतर्रार व्यक्तित्व और सरल व शालीन व्यवहार को याद करते हुए जब लोग भावुक हुए,तो वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं,हर किसी की जुबां पर बस एक ही सवाल था कि आखिर इतनी कम उम्र में एक होनहार जिंदगी इस तरह कैसे थम गई,केशव के करीबी रिश्तेदार एवं पलामू प्रमंडल के सामाजिक कार्यकर्ता नवीन तिवारी ने बताया कि केशव को बुखार की शिकायत हुई थी,इसके बाद जब उसकी रक्त जांच कराई गई,तो ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया,स्थिति की गंभीरता को समझते हुए वे परिजनों के साथ तत्काल उसे लेकर रांची रवाना हुए,वहां उसे रानी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया,चिकित्सकों ने उसे बचाने का भरपूर प्रयास किया,लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था।
दो दिनों तक केशव अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा,परिजनों की उम्मीदें हर पल उसके ठीक होने की खबर सुनने को बेताब थीं,परिवार की दुआएं,अपनों की उम्मीदें और चिकित्सकों के तमाम प्रयास भी आखिरकार उसे बचा नहीं सके,दो दिनों तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद केशव ने दुनिया को अलविदा कह दिया,सोचिए,उस परिवार पर क्या बीत रही होगी,जिसने अपने बच्चे को बेहतर भविष्य के सपनों के साथ बड़ा किया था,जिस घर में कभी उसकी हंसी गूंजती थी,जहां उसकी पढ़ाई और कामयाबी की बातें होती थीं,आज उसी घर में उसके जाने का सन्नाटा पसरा है,यह सिर्फ एक बच्चे की मौत नहीं,बल्कि उन अनगिनत सपनों का टूट जाना है,जिन्हें उसके परिवार ने उसकी आंखों में देखा था।
शुक्रवार को केशव का अंतिम संस्कार सरस्वतिया नदी के घाट पर किया गया,अपने चहेते केशव को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे,इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला महामंत्री संतोष दूबे,शिक्षक नेता कमलेश्वर पाण्डेय,सामाजिक कार्यकर्ता नवीन तिवारी,पिंकू तिवारी,प्रवीण तिवारी,विभूति तिवारी,अनुप तिवारी सहित सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे,सभी ने नम आंखों से केशव को अंतिम विदाई दी,अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का गवाह था कि केशव सिर्फ अपने परिवार का प्यारा नहीं था,बल्कि उसने अपने व्यवहार और व्यक्तित्व से लोगों के दिलों में भी जगह बनाई थी।
वहीं,केशव के पैतृक गांव पूरे पोटमा में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है,हर घर में इस दुखद घटना की चर्चा है और हर चेहरा गमगीन है,किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि जिस बच्चे को कुछ दिन पहले तक हंसते खेलते और पढ़ाई करते देखा था,वह अब इस दुनिया में नहीं रहा,आज संत पाल स्कूल का एक होनहार विद्यार्थी,एक परिवार की आंखों का तारा और समाज की एक उज्ज्वल उम्मीद हमेशा के लिए खामोश हो गई,केशव की कमी शायद कभी पूरी नहीं हो सकेगी,उसकी यादें,उसकी मुस्कान और उसकी प्रतिभा हमेशा अपनों के दिलों में जिंदा रहेंगी,अलविदा केशव,तुम्हारी उम्र भले ही छोटी थी,लेकिन तुम्हारी पहचान और तुम्हारी यादें हमेशा बड़ी रहेंगी।




