
राहुल गांधी जवाब दें—हजारों सिखों के कत्लेआम के बाद राजीव गांधी ने क्यों कहा था, ‘जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है’?
जमशेदपुर। भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य कुलवंत सिंह बंटी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने कहा कि 1 नवंबर सिख समाज के लिए कोई सामान्य तारीख नहीं, बल्कि इतिहास का वह काला दिन है, जिसकी याद आते ही आज भी हजारों परिवारों की आंखें नम हो जाती हैं। वर्ष 1984 में दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में निर्दोष सिखों का कत्लेआम हुआ। घर जलाए गए, परिवार उजाड़े गए, माताओं की गोद सूनी हुई और मासूम बच्चों से उनके माता-पिता छीन लिए गए। यह केवल हिंसा नहीं, बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाला इतिहास था।
बंटी ने कहा कि सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि उस भयावह नरसंहार के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था— “जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती थोड़ी हिलती है।” हजारों निर्दोष लोगों की मौत के बाद आया यह बयान आज भी सिख समाज के दिलों में चुभता है। राहुल गांधी को बताना चाहिए कि क्या उनके परिवार और कांग्रेस नेतृत्व ने कभी उन पीड़ित परिवारों के दर्द को समझने की ईमानदार कोशिश की?
उन्होंने कहा कि आज उसी 1 नवंबर की तारीख को राहुल गांधी रामलीला मैदान में रैली करने जा रहे हैं और देश के विभिन्न राज्यों से लोगों को दिल्ली बुलाया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या कांग्रेस को सिख समाज की भावनाओं का जरा भी ख्याल नहीं? क्या कांग्रेस नेतृत्व को यह तारीख बदलने में भी परेशानी है? राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए देश में हजारों तारीखें हैं, लेकिन 1 नवंबर ही क्यों?
कुलवंत सिंह बंटी ने दो टूक कहा कि कांग्रेस पहले 1984 के नरसंहार के इतिहास और पीड़ित परिवारों के सवालों का जवाब दे, फिर लोकतंत्र और संविधान की दुहाई दे। जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया, जिनकी पीढ़ियां आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रही हैं, उनके दर्द को राजनीतिक मंचों की भीड़ और भाषणों के नीचे दबाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि सिख समाज अपने इतिहास को भूला नहीं है और न ही अपने शहीदों एवं पीड़ित परिवारों के अपमान को स्वीकार करेगा। 1984 के जख्मों पर मरहम लगाने की जरूरत है, उन्हें फिर से कुरेदने की नहीं।
राहुल गांधी से हमारी मांग है कि 1 नवंबर की रैली की तारीख बदलें और 1984 के पीड़ित सिख परिवारों की भावनाओं का सम्मान करें। सिख समाज को खोखले राजनीतिक भाषण नहीं, न्याय, जवाबदेही और सम्मान चाहिए।




