
वर्ष 1984 के सिख कत्लेआम के 42 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आज चास गुरुद्वारा में दिवंगत एवं निर्दोष सिखों की याद में श्रद्धा और सम्मान के साथ विशेष धार्मिक एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया!
चास गुरुद्वारा विशेष रूप
से पहुँचे ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्वी भारत अध्यक्ष एवं 1984 सिख कत्लेआम के पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाने की क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे सतनाम सिंह गंभीर ने बताया की 1984 के सिख कत्लेआम में मारे गए 73 निर्दोष सिखों के नामों से निर्मित ‘सच की दीवार’ (यादगारी दीवार) संगत को समर्पित की गई। यह दीवार उन निर्दोष लोगों की याद को हमेशा जीवित रखने का एक प्रयास है, जिन्होंने उस भयावह दौर में अपनी जान गंवाई। उपस्थित संगत ने शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम के माध्यम से चास गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी प्रधान जसमीत सिंह सोडी ने मीडिया के जरिए भारत के प्रधानमंत्री, झारखंड के मुख्यमंत्री, बोकारो के उपायुक्त (DC) एवं अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास किया।
सतनाम सिंह गंभीर ने कहा कि 1984 के सिख कत्लेआम को हुए 42 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी कई पीड़ित परिवार न्याय, उचित मुआवजे और सरकारी सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पीड़ित परिवारों को अब तक न तो अपेक्षित न्याय मिला है और न ही मुआवजे का मामला पूरी तरह स्पष्ट हुआ है।
जसमीत सिंह सोड़ी ने सरकार से सवाल किया कि आखिर पीड़ित परिवारों को और कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा? बार-बार पुराने जख्मों को कुरेदने और बुजुर्ग पीड़ितों को वर्षों तक सरकारी प्रक्रियाओं में उलझाए रखने के बजाय अब इस मामले पर एक स्पष्ट और अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से इंदर सिंह इंदर तरसेम सिंह अमरजीत सिंह भामरा मनप्रीत सिंह रविन्द्र सिंह सलूजा सुखविंदर सिंह गुरमीत सिंह सतनाम सिंह जसबीर सिंह सलूजा हरबंस सिंह शामिल थे ।







