
गीत-संगीत, नृत्य और रंगोली से सजा सांस्कृतिक मंच, नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपनी प्रतिभा से बिखेरी भारतीय संस्कृति की अनूठी छटा
आकाश लोहार
गढ़वा
गढ़वा। त्योहार सिर्फ खुशियां मनाने का अवसर नहीं होते, बल्कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का भी एक खूबसूरत माध्यम होते हैं। जब नन्हे-मुन्ने बच्चे अपने अभिनय, गीत और नृत्य के जरिए भारतीय संस्कृति की तस्वीर पेश करते हैं, तो वह दृश्य हर किसी के दिल को छू जाता है। कुछ ऐसा ही मनमोहक नजारा गढ़वा के ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल में देखने को मिला, जहां दीपावली की जगमगाहट और लोक आस्था के महापर्व छठ की पवित्रता के बीच भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने न केवल दर्शकों का मन मोह लिया, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं की खूबसूरती का भी अहसास कराया।
कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने गीत, संगीत, नृत्य और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दीपावली एवं छठ महापर्व की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्ता को जीवंत कर दिया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों से पूरा विद्यालय परिसर उत्साह, उमंग और उल्लास से सराबोर हो उठा।
कार्यक्रम में नृत्य शिक्षिका रश्मि रंजन स्वाइन के नेतृत्व में कक्षा चार रोज के बच्चों ने ‘राम आएंगे’ गीत पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं कक्षा तीन रोज के बच्चों ने पारंपरिक झींझिया नृत्य के माध्यम से लोक संस्कृति की सुंदर झलक पेश की।
विद्यालय के संगीत शिक्षक चंचल पाठक के नेतृत्व में अनन्या, वान्या, हर्षिका, श्रेयांश सहित अन्य विद्यार्थियों ने छठ गीत प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। वहीं कक्षा पांच एवं छह की छात्राएं आराध्या, उन्नति, जाह्नवी, पंखुड़ी, एंजेल तथा श्रेयांशी ने ‘पटना के घटिया पर, गीत पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति को मुख्य रूप से अंस्मिता श्रीवास्तव ने प्रशिक्षित किया था।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण छठ पूजन पर आधारित स्किट रहा। इसमें अंस्मिता श्रीवास्तव, आराध्या, वैष्णवी, हर्षिका, शांभवी, अंशुमन, अर्णव, प्रशांत, रौनक, श्रेयांश सहित अन्य विद्यार्थियों ने भाग लिया। बच्चों ने अपने अभिनय के माध्यम से छठ महापर्व की पवित्रता, सूर्योपासना, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और पारिवारिक-सामाजिक एकता का संदेश दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ-साथ विद्यालय में रचनात्मक गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। कक्षा प्रेप लोटस एवं प्रेप रोज के बच्चों के बीच रंग, फूल और रंग-बिरंगे चावलों से रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में प्रेप लोटस से अन्वी श्रीवास्तव ने प्रथम, दिवेश ने द्वितीय तथा अमूल्या गुप्ता ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं प्रेप रोज में कनक प्रिया ने प्रथम, लाइवा अहसन ने द्वितीय तथा अरिज राजा ने तृतीय स्थान हासिल किया।
दीपावली के अवसर पर बच्चों को पारंपरिक मिट्टी के दीयों के महत्व और रचनात्मकता से जोड़ने के उद्देश्य से दिया मेकिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। कक्षा प्री-नर्सरी के बच्चों में जैनब फातमा, अद्विक तिवारी एवं दृष्टि कुमारी ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं नर्सरी वर्ग में इवान ने प्रथम, दिव्यांशु ने द्वितीय तथा जियांशी एवं रुद्धव ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया।
इस पूरे आयोजन का उद्देश्य बच्चों को केवल त्योहार मनाने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति, परंपराओं, लोक आस्था और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना भी था। बच्चों ने जिस उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रस्तुतियां दीं, उससे यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालय में पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनकी छिपी प्रतिभाओं को निखारने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक श्री अनूप सोनी, सचिव श्री आलोक सोनी एवं विद्यालय प्रबंधन ने विद्यार्थियों की प्रतिभा और शानदार प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास, रचनात्मकता और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने समस्त गढ़वावासियों को दीपावली एवं छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।
वहीं विद्यालय के प्राचार्य श्री निरकेष शर्मा ने भी बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी प्रस्तुतियों की प्रशंसा की तथा सभी को दीपावली एवं छठ महापर्व की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का समापन हर्षोल्लास और मंगलकामनाओं के साथ हुआ। पूरे आयोजन में विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों का उत्साह, समर्पण और सहयोग भी सराहनीय रहा।
सचमुच, जब शिक्षा के साथ संस्कार, प्रतिभा के साथ परंपरा और उत्सव के साथ संस्कृति का संगम होता है, तभी बच्चों के सर्वांगीण विकास की सच्ची तस्वीर सामने आती है। ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल का यह आयोजन इसी खूबसूरत सोच का एक जीवंत उदाहरण बना।




