हिंडाल्को के दुर्गा मंदिर में 1950 से हो रही है दुर्गा पूजा

On: October 9, 2024 4:09 PM

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सिल्ली:- मुरी हिंडालको कॉलोनी में सन 1950 से ही दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। बताते चले कि यहां पहले सिर्फ तिरपाल व बांस के सहारे पंडाल का निर्माण किया जाता था। पूजा के दौरान सिर्फ ढाक, शंख और घंटा की आवाज से वातावरण गूंजायमान रहता था। संध्या को सप्तमी के दिन से आरती शुरू हो जाती थी जो आज भी बदस्तूर जारी है। पूर्व में बड़े बुजुर्ग ही धुना नाच में हिस्सा लेते थे जबकि आज युवा व बच्चों के अलावा लड़कियां भी धुना नाच में बढ़-चढ़कर भाग लेती हैं। मां की विदाई बेला में मूर्ति चुमावन के पश्चात महिलाओं द्वारा आनंदपूर्वक सिंदूर भी आपस में खेला जाता है। विसर्जन के पश्चात पंडाल में सभी महिला पुरुष के बीच पुरोहित द्वारा शांति जल के छिड़काव के पश्चात लोग गले मिलकर एक दूसरे को भी दशमी की शुभकामनाएं देते हैं। विजयदशमी के बाद लक्खी पूजा के अवसर पर मनोरंजन हेतु कोलकाता की नामी गिरामी यात्रा पार्टी द्वारा नाटक यात्रा का मंचन भी किया जाता था। इस यात्रा का आनंद उठाने उन दिनों झालदा, तुलिन, जयपुर,सिल्ली, बंता, पतराहातू समेत आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में साइकिल एवं पैदल पहुंचने थे तब के दिनों में दशहरा में कड़ाके की ठंड पड़ती थी।बावजूद इसके देर रात तक महिला पुरुष यात्रा देखने के लिए जमे रहते थे आज के बदलते परिदृश्य में कॉलोनी के बीचो-बीच भव्य स्थायी पंडाल समेत मूर्ति के ठीक सामने पक्का स्टेज का निर्माण किया जा चुका है। जहां स्थानीय बच्चों व कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। मूर्ति व चबूतरे के बीच का स्थान खाली रखा गया है जहां संध्या को लोग परिवार के साथ पहुंचते हैं। यहीं पर धुना नाच का आयोजन किया जाता है एवं विजेता को पुरस्कृत किया जाता है। पंडाल के ठीक पीछे चिल्ड्रन पार्क है जहां मेला देखने पहुंचे बच्चे झुला व स्लीपर का आनंद उठाते हैं। वहीं अभिभावकगण पार्क में बैठकर आइसक्रीम खाते हुए बच्चों को खेलते हुए देखे नजर आते हैं। पंडाल के पश्चिम पटाखा व खिलौने आदि की दुकान लगती है और मेले के दौरान उनकी खूब बिक्री भी होती है। पहले आतिशबाजी एवं रावण दहन नहीं हुआ करता था आज बड़े पैमाने पर इसका आयोजन होता है। पहले कम संसाधनों के बावजूद यात्रा का निशुल्क आयोजन हिंडालको द्वारा कराया जाता था। ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी उन दिनों की आयोजित यात्रा की चर्चाएं होती हैं।