
डुमरी:आदिवासी सेंगेल अभियान के तत्वावधान में डुमरी मोड़, डुमरी में सेंगेल छात्र मोर्चा गिरीडीह जिला अध्यक्ष दिलीप टुडू के नेतृत्व में झारखंड सरकार हेमंत सोरेन सहित दर्जा प्राप्त मंत्री फागु बेसरा, मरांगबुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा और माझी परगना महल का पुतला दहन किया गया।
पुतला दहन पर मौजूद झारखंड प्रदेश संयोजक सह बोकारो जोनल परगना करमचंद हांसदा ने कहा कि आज 5 नवंबर 2026 को मरांग बुरु(पारसनाथ पहाड़) गिरीडीह मधुबन में धर्म सम्मेलन नहीं ,JMM हेमंत सोरेन सरकार की गिरीडीह उपचुनाव की चुनावी सभा है। धर्म सम्मेलन के नाम पर आदिवासियों को दिग्भ्रमित किया जा रहा है। इसका असली खेल मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा,माझी परगना महल और सोनोत संताल समाज कर रही है । मरांग बुरु धर्म सम्मेलन के नाम पर आयोजित कर आदिवासीयों के विश्वासघात किया है।
आगे करमचंद हांसदा ने कहा कि कहा कि मारंग बुरु बचाओ मोर्चा और माझी परगना महल ये दोनों संगठन झारखंड मुक्ति मोर्चा के बंधुआ मजदूर हैं।
प्रमाण 1: मारंग बुरु बेचने का पाप
05-01-2023 को झारखंड के मुख्यमंत्री रहते हुए श्री हेमंत सोरेन ने मारंग बुरु (पारसनाथ सम्मेद शिखर) को जैनों का पवित्र तीर्थस्थल बताकर केंद्र सरकार को लिखित रूप से सौंप दिया। यह संताल समाज और समस्त आदिवासियों के सबसे बड़े धार्मिक आस्था केंद्र के साथ विश्वासघात है।
अब अपने इस काले कारनामे को छिपाने के लिए झारखंड सरकार में मर्यादा प्राप्त राज्य मंत्री श्री फागु बेसरा के द्वारा *मारंग बुरु बचाओ मोर्चा* बनाकर और 05 नवंबर 2026 को मारंग बुरु में हेमंत सोरेन को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाना, आदिवासी समाज को भ्रमित करने का एक सुनियोजित प्रयास मात्र है।
प्रमाण 2: घाटशिला उप-चुनाव में JMM की दलाली
पिछले घाटशिला उप-चुनाव 2025 में माझी परगना महाल ने अपने मंच से JMM प्रत्याशी श्री सोमेश चंद्र सोरेन को खुलेआम पूर्ण समर्थन देकर खुद को JMM का बंधुआ साबित कर दिया।
इसलिए आदिवासी सेंगेल अभियान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मर्यादा प्राप्त राज्य मंत्री फागु बेसरा और माझी परगना महल का सर्वत्र पुतला दहन किया गया।
उक्त दोनों संगठन मारंग बुरु को बचाने के बजाय JMM के वोट बैंक को बचाने में लगे हैं। सेंगेल की मांग है कि पहले मारंग बुरु को जैनों के कब्जे से मुक्त कर संताल आदिवासियों को सौंपा जाए।
सेंगेल के बोकारो जोनल हेड सुखदेव मुर्मू ने कहा कि मरांगबुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा और माझी परगना महल की भूमिका एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के साथ उनके राजनीतिक संबंधों को लेकर समाज में सवाल उठ रहे हैं ।
उक्त दोनों संगठनों से हमारा सवाल है :
1. क्या आप दोनों संगठन आदिवासी समाज के स्वतंत्र सामाजिक एवं धार्मिक संगठन हैं या JMM पार्टी के प्रभाव में दलाली और चमचागीरी काम कर रहे हैं ?
2. घाटशिला उपचुनाव में JMM प्रत्याशी को समर्थन देने का फैसला किस आधार पर और किसकी सहमति से लिया गया था ?
3. मरांगबुरु जैसे आदिवासी समाज के आस्था स्थल पर हेमंत सोरेन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित क्यों ? और आमंत्रित करने का Permission किसने दिया और समाज की सहमति ली गई थी या नहीं ?
4. यदि मरांगबुरु की रक्षा ही आपका मुख्य उद्देश्य है, तो मरांगबुरु से जुड़े विवादों और समाज के सवालों पर आपका स्पष्ट मुख्य अर्थ क्या है ?
5. क्या आप इन सभी सवालों का जवाब सार्वजनिक रूप से आदिवासी समाज को देने के लिए तैयार हैं ? तो अविलंब जवाब दो ।
मरांगबुरु किसी राजनीतिक पार्टी की संपत्ति नहीं हैं । वे आदिवासी समाज की आस्था, पहचान और सम्मान से जुड़े हुए हैं । आदिवासी समाज के हितों से बड़ा किसी नेता या राजनीतिक पार्टी का हित नहीं हो सकता।
पुतला दहन में झारखंड प्रदेश संयोजक जयराम सोरेन,अर्जुन मरांडी,माहा किस्कू, संजय किस्कू,बोकारो जिला से सेंगेल माझी परगना मंडवा के जिला महासचिव फुलचंद किस्कू, आनंद टुडू,हजारीबाग जिला से बाहाराम हांसदा,बाहाराम मरांडी, दिनेश टुडू, रुपलाल बास्के, रतीराम हांसदा,राजेश मुर्मू, बिनोद मुर्मू, बिनोद टुडू, अनिल सोरेन, बिनोद मुर्मू, विनोद मुर्मू, बिनोद टुडू और अन्य लोग उपस्थित थे।





