बाबूलाल ने जेपीएससी परीक्षा में गड़बड़ी की सीआईडी जांच पर उठाए सवाल, कहा- इस सरकार में अफसर बनने के लिए 40 लाख रुपये तय है रेट
प्रेस वार्ता के दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी व अन्य। (फोटो-ईटीवी भारत)
रांची:राज्य के पहले मुख्यमंत्री और वर्तमान में झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने 14वीं जेपीएससी परीक्षा में गड़बड़ी मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है. रविवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इस मामले की सीआईडी जांच सच्चाई सामने लाने के लिए नहीं बल्कि सबूत मिटाने के लिए की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ही सारी गड़बड़ी पैदा कर रही है. उन्होंने साफ किया कि राज्य सरकार का मतलब मुख्यमंत्री है, अगर मुख्यमंत्री इस मामले में पूरी तरह से पाक-साफ हैं तो उन्हें सीबीआई जांच से आपत्ति क्यों है? मुख्यमंत्री को तुरंत पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिए.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की ओएमआर शीट में गड़बड़ी का यह मामला एक सुनियोजित घोटाला है, जो युवाओं का भविष्य बर्बाद करने और अयोग्य लोगों को अधिकारी बनाने के लिए किया जा रहा है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह देखकर और सुनकर बहुत अच्छा लग रहा है कि राज्य सरकार त्वरित कार्रवाई कर रही है. सीआईडी जांच कर रही है और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं, लेकिन यह सच नहीं है. सच तो ये है कि ये सब सिर्फ पर्दा डालने की कोशिश है.
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का बयान. (वीडियो-ईटीवी भारत)
सीआइडी जांच के नाम पर किया जा रहा है आंख में धूल : बाबूलाल
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य के युवाओं के साथ अन्याय हुआ है, यह बड़ा अपराध है. सीआइडी जांच छात्रों को न्याय दिलाने के लिए नहीं, बल्कि छात्रों के साथ अन्याय करने वाले माफियाओं को बचाने के लिए करायी जा रही है. क्योंकि सत्ता में बैठे लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि जिस दिन इस मामले की निष्पक्ष जांच हो जाएगी, सारे चेहरे बेनकाब हो जाएंगे और पर्दे के पीछे छुपे सारे लोग पकड़े जाएंगे. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इसलिए इस जांच के नाम पर आंख में धूल झोंकी जा रही है.
‘सबूत मिटाने की हो रही कोशिश’
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि शराब घोटाला, जेएसएससी सीजीएल समेत अन्य मामलों में सीआइडी जांच के ट्रैक रिकॉर्ड का मूल्यांकन करें, पूरी स्थिति स्पष्ट हो जायेगी और सीआइडी जांच की विश्वसनीयता का पता चल जायेगा. सीआइडी कभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती. वह आरोप पत्र भी दाखिल नहीं कर पा रही है. शराब घोटाले में जिस तरह कागजातों में हेराफेरी की गयी, इस मामले में भी पूर्व राष्ट्रपति एल खियांग्ते के घर पर छापेमारी और अन्य सभी कार्रवाई उसी की एक कवायद है. उन्होंने कहा कि सीआईडी अधिकारी सभी सबूतों को नष्ट करने के लिए छापेमारी कर रहे हैं.
दर्ज की गई एफआईआर पर भी सवाल उठाए गए
पूरे मामले में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जेपीएससी घोटाला मामले में किसके बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है, यह भी सार्वजनिक नहीं किया गया है. यह तथ्य कि एफआईआर अभी तक सार्वजनिक डोमेन में नहीं है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, कई सवाल खड़े करता है। एफआईआर को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है ताकि दोषियों को इसका फायदा मिल सके.
सीआईडी एडीजी की कार्यशैली पर सवाल
उन्होंने सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक मनोज कौशिक की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और कहा कि मनोज कौशिक आज भी मुख्यमंत्री के चहेते अधिकारी बने हुए हैं. इन्हें तीन-तीन पदों पर रखा गया है. वे कोयला, रेत और अन्य खनिज संसाधनों को इकट्ठा करने के काम के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने मनोज कौशिक को सलाह दी कि पूर्व सीएम के कई चहेते अफसरों जैसे विनय चौबे, अनुराग गुप्ता समेत अन्य का हश्र देख लीजिए, आपका भी यही हश्र होने वाला है. उन्होंने कहा कि सीआइडी को बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना बंद करना चाहिए.
एल ख्यांग्ते की गिरफ्तारी की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि जनवरी में ही कर्नाटक के एक छात्र ने ओएमआर शीट में गड़बड़ी और टीडीपीएल कर्मचारी अभय तिवारी की हरकतों को लेकर तत्कालीन जेपीएससी चेयरमैन एल ख्यांगते को पत्र लिखा था. इससे पहले भी उन्होंने रेंज ऑफिसर परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी दी थी. उन्होंने दोनों मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की. सिर्फ इस्तीफा देकर वह कैसे मुक्त हो सकते हैं? सरकार को एल. ख्यांग्ते के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए और उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
अफसर बनने के लिए देने होंगे 40 लाख: बाबूलाल
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में अधिकारी बनने के लिए 40 लाख रुपये रिश्वत ली जाती है. उनके पास जो जानकारी है उसके मुताबिक पीटी परीक्षा पास करने के लिए 5 लाख रुपये, मेन्स परीक्षा पास करने के लिए 25 लाख रुपये और इंटरव्यू पास करने के लिए 10 लाख रुपये यानी कुल 40 लाख रुपये लिए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ने ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को हर जगह तैनात कर दिया है, जेएसएससी में भी सुधीर गुप्ता इसी तरह भ्रष्ट हैं, उन्होंने पूर्व मुख्य परीक्षा नियंत्रक विशाल कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाये.
पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अगर झारखंड में उसी संस्थान में भ्रष्ट लोग बैठे रहेंगे, जहां अधिकारी बनते और चयनित होते हैं, तो झारखंड का भविष्य कभी नहीं सुधरेगा. जेपीएससी, जहां से राज्य के बच्चों का भविष्य निर्भर करता है, जहां से सरकारी अधिकारियों का चयन होता है, अगर यह भ्रष्ट रहेगा तो अच्छे अधिकारी कभी भी झारखंड की धरती पर नहीं आ पाएंगे. जब बुनियाद ही भ्रष्ट होगी तो झारखंड में भ्रष्टाचार से कैसे बचा जा सकता है? सरकार जानबूझकर ऐसे अयोग्य अधिकारियों की नियुक्ति करती है. इसलिए इस पूरे मामले की सीबीआई जांच जरूरी है.
सीआइडी को सरकार की कठपुतली बताया.
उन्होंने कहा कि इस्तीफे से कुछ हासिल नहीं होता. जिस तरह हाल ही में जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष का इस्तीफा लिया गया था, उसी तरह पिछले दिनों नीरज सिन्हा का भी इस्तीफा ले लिया गया था. क्या इसका कोई परिणाम निकला? पहले भी JSSC CGL में हुई अनियमितताओं की जांच CID ने ही की थी, उसका नतीजा क्या निकला? सीआइडी सरकार की कठपुतली है.
यहां तक कि डीजीपी भी कभी सीआइडी की समीक्षा नहीं करते. शराब घोटाला मामले में आज तक न तो आरोप पत्र दाखिल किया गया है और न ही कोई समीक्षा की गयी है. अगर भ्रष्टाचारियों को शीर्ष पदों पर रखना है तो झारखंड का भगवान ही मालिक है. इसलिए बिना किसी देरी के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिए, ताकि बच्चों का भविष्य अंधकारमय न हो और जो भी दोषी हों, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
झारखंड में खुलेआम बिक रही हैं नौकरियां : बाबूलाल
बाबूलाल ने कहा कि झारखंड सरकार में कोई भी भर्ती परीक्षा विवाद से परे नहीं है. यहां खुलेआम नौकरियां बेची जा रही हैं. सब कुछ राज्य सरकार के संरक्षण में हो रहा है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह और प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी मौजूद रहीं.
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