
नई दिल्ली: लाल किला ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की 7,500 पन्नों की चार्जशीट में कई अहम खुलासे हुए हैं। जिसमें 13 आरोपियों के नाम हैं। NIA की चार्जशीट में सामने आया है कि इस हमले का मास्टरमाइंड डॉ. उमर उन नबी था, जो सुसाइड बॉम्बर था और इसने ही कार के अंदर बैठकर ब्लास्ट किया था
जांच एजेंसी के मुताबिक, 10 नवंबर को हुआ ब्लास्ट आत्मघाती बम हमला था और आरोपी उमर उन नबी ने अपनी i20 कार में लगे आईईडी को एक कमांड मैकेनिज्म के जरिए सक्रिय किया था। इस ब्लास्ट में 11 लोगो की मौत हुई थी और 29 लोग घायल हुए थे।
NIA के अनुसार, पेशे से डॉक्टर और फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुका नबी विस्फोट के वक्त कार के भीतर मौजूद था। घटनास्थल से बरामद जैविक नमूनों के डीएनए विश्लेषण ने भी इस बात की पुष्टि की कि विस्फोट के समय वह वाहन में था। चार्जशीट के मुताबिक, नबी को ‘पिंडा’ और ‘राहुल भट्ट’ जैसे नामों से भी जाना जाता था।
चार्जशीट में दावा किया गया है कि लाल किले को निशाना बनाने की योजना अचानक नहीं बनी थी। NIA की जांच के मुताबिक, दिसंबर 2023 से ही लाल किले की रेकी की जा रही थी। नबी और उसके सहयोगियों ने कथित तौर पर कई बार इस स्थान का दौरा किया था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि लाल किले को इसलिए चुना गया क्योंकि इसे भारतीय राज्य और उसकी संप्रभुता के एक प्रमुख प्रतीक के तौर पर देखा जाता था।
NIA ने उमर उन नबी को कथित तौर पर साजिश का मास्टरमाइंड और दोबारा सक्रिय किए गए अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल का “ऑपरेशनल इंचार्ज” बताया है। चार्जशीट के अनुसार, नबी 2022 की शुरुआत से निष्क्रिय पड़े इस मॉड्यूल को फिर से सक्रिय करने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए कट्टरपंथी लोगों का नेटवर्क तैयार करने में लगा था। AGuH को NIA ने भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा से जुड़े एक नामित संगठन के तौर पर बताया है।
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि हमले की तारीख पहले से निश्चित नहीं थी। NIA के मुताबिक, श्रीनगर में कई गिरफ्तारियां होने के बाद नबी को आशंका हुई कि साजिश का खुलासा हो सकता है। इसके बाद उसने कथित तौर पर हमले को जल्द अंजाम देने का फैसला किया।
जांच में सामने आया कि जिस वाहन का इस्तेमाल किया गया, उसे व्हीकल-बोर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) के रूप में तैयार किया गया था। NIA ने दावा किया है कि जांच के दौरान विस्फोटक तैयार करने और उन्हें सुरक्षित रखने से जुड़े रसायन तथा प्रयोगशाला उपकरण भी बरामद किए गए।
विस्फोट स्थल से बरामद सामग्री की फोरेंसिक जांच में TATP और अमोनियम नाइट्रेट के निशान मिलने की बात चार्जशीट में कही गई है। एजेंसी के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि वाहन के भीतर मौजूद कमांड मैकेनिज्म के जरिए आईईडी को सक्रिय किया गया था।
NIA की चार्जशीट में मॉड्यूल के सदस्यों द्वारा कथित तौर पर पढ़ी और अपनाई जाने वाली वैचारिक सामग्री का भी जिक्र किया गया है। इनमें “Lone Mujahid Pocket Book/How to Become an Assassin” नामक दस्तावेज प्रमुख है, जिसे जांच एजेंसी ने अल-कायदा इन द अरबियन पेनिनसुला (AQAP) से जोड़ा है।
चार्जशीट के मुताबिक, बरामद सामग्री में आतंकवादी गतिविधियों, हथियारों और विस्फोटकों से संबंधित संचालनात्मक निर्देशों के साथ अकेले किए जाने वाले तथा आत्मघाती हमलों को बढ़ावा देने वाली सामग्री भी शामिल थी।
जांच एजेंसी ने “Definition of Jihad”, “The Requirements of Jihad”, “The 21 Aims and Objectives of Jihad”, “39 Ways to Serve and Participate in Jihad” और “44 Ways to Support Jihad” जैसे दस्तावेजों का भी उल्लेख किया है।
NIA का आरोप है कि इस साहित्य के जरिए सशस्त्र हिंसा को उचित ठहराने, मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं को खारिज करने और जिहाद को धार्मिक कर्तव्य के तौर पर पेश करने की विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा था।
चार्जशीट में नबी पर मॉड्यूल के सदस्यों के कथित कट्टरपंथीकरण, गुप्त बैठकों के आयोजन और आतंकी प्रशिक्षण की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की बात सामने आई है।
NIA के अनुसार, मॉड्यूल के लिए धन जुटाने, अवैध हथियार हासिल करने और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने में भी उसकी भूमिका थी। आरोपियों के बीच संपर्क के लिए Signal जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली-NCR के अलग-अलग स्थानों पर गुप्त बैठकें आयोजित की जाती थीं। NIA की चार्जशीट में इन गतिविधियों को लाल किले पर हुए विस्फोट से जुड़ी व्यापक साजिश का हिस्सा बताया गया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी जसीर बिलाल वानी ने YouTube और ChatGPT का इस्तेमाल रॉकेट बनाने और उससे जुड़े तकनीकी प्रयोगों की जानकारी जुटाने के लिए किया था। एजेंसी का दावा है कि उसने रॉकेट IED तैयार करने की प्रक्रिया समझने के लिए इंटरनेट पर कई तरह की सामग्री सर्च की थी।
NIA के अनुसार, जसीर बिलाल वानी ने YouTube पर रॉकेट बनाने और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों के अनुपात से संबंधित जानकारी खोजी। इसके अलावा उसने चीनी और पोटेशियम नाइट्रेट के इस्तेमाल से रॉकेट बनाने से जुड़े वीडियो भी देखे। जांच एजेंसी ने चार्जशीट में दावा किया है कि जसीर ने रॉकेट IED तैयार करने के लिए ChatGPT से भी जानकारी हासिल की थी।
चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी आदिल अहमद राथर ने रॉकेट तैयार करने के लिए जसीर बिलाल वानी को पिसी हुई चीनी और पोटेशियम नाइट्रेट उपलब्ध कराया था, जबकि उमर उन नबी ने कथित तौर पर इसके लिए आर्थिक मदद की थी। NIA का दावा है कि आरोपियों ने ऑनलाइन हासिल की गई जानकारी के आधार पर रॉकेट IED तैयार करने की कोशिश की थी।
जांच के दौरान NIA ने अनंतनाग के काजीगुंड स्थित जंगल से रॉकेट IED के टूटे हुए हिस्से बरामद किए। एजेंसी के अनुसार, आदिल अहमद राथर के निर्देश पर मुजम्मिल शकील ने अपने एक परिचित के माध्यम से रॉकेट IED में इस्तेमाल के लिए लोहे का पाइप तैयार करवाया था।
NIA ने चार्जशीट में यह भी दावा किया है कि जांच के दौरान बॉम्ब स्क्वॉड के विशेषज्ञों की मौजूदगी में जसीर बिलाल वानी ने डमी सामग्री का इस्तेमाल करके रॉकेट IED तैयार करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया था। इस दौरान लोहे के पाइप, तार, चीनी, बैटरी, ब्लोअर कॉइल और नमक जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया गया था।
NIA के मुताबिक, आरोपी अपनी कथित साजिश में ड्रोन के इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाश रहे थे। इसकी जिम्मेदारी जसीर बिलाल वानी को दी गई थी। जांच एजेंसी ने काजीगुंड के जंगल से एक क्षतिग्रस्त ड्रोन भी बरामद किया।
ड्रोन की फोरेंसिक जांच चंडीगढ़ स्थित प्रयोगशाला में कराई गई। जांच में सामने आया कि यह कैमरे से लैस रिमोट-कंट्रोल ड्रोन था, जिसे वाई-फाई के जरिए मोबाइल फोन से कनेक्ट किया जा सकता था।
जसीर बिलाल वानी के क्लाउड डेटा और मोबाइल फोन की जांच में भी ड्रोन से जुड़ी गतिविधियों के संकेत मिलने का NIA ने दावा किया है। एजेंसी के मुताबिक, उसने YouTube पर ड्रोन के ट्रांसमीटर की रेंज टेस्टिंग से संबंधित वीडियो देखे थे। इसके अलावा, उमर उन नबी के कमरे से ‘J2 Drone’ का एक खाली कार्टन भी बरामद किए जाने की बात चार्जशीट में कही गई है।






