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बर्मामाइंस खाद्यान्न गोदाम और डोर स्टेप डिलीवरी में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के खिलाफ डीसी से शिकायत

On: May 31, 2026 11:35 AM
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जविप्र दुकानदार मनोज गुप्ता ने पत्र सौंप निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की

जमशेदपुर:बर्मामाइंस खाद्यान्न गोदाम और डोर स्टेप डिलीवरी व्यवस्था में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के खिलाफ टेल्को के खड़ंगाझार (राधिका नगर) स्थित जन वितरण प्रणाली दुकानदार मनोज गुप्ता ने जिले के डीसी राजीव रंजन से शिकायत की है।उन्होंने डीसी को एक पत्र सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

दुकानदारों का आरोप है कि बर्मामाइंस गोदाम से उन्हें राशन का आधिकारिक डीलरशिप चालान (पावती रसीद) नहीं दिया जा रहा है. जिससे पूरी व्यवस्था संदेह के घेरे में है. नियमानुसार राशन सुपुर्दगी के समय दुकानदारों को दो रंगों (पीला और गुलाबी) का चालान मिलना चाहिए. जिसमें से एक प्रति हस्ताक्षरित होकर गोदाम जाती है और दूसरी दुकानदार के पास प्रमाण के रूप में रहती है. बर्मामाइंस गोदाम में पिछले दो वर्षों से यह व्यवस्था पूरी तरह ठप है.

बिना माल दिये ऑनलाइन ”रिसीव” कराने का खेल

डीलर ने आरोप लगाया है कि कई बार गोदाम से वास्तविक खाद्यान्न की आपूर्ति किये बिना ही उसे ऑनलाइन (डोर स्टेप डिलीवरी) दिखा दिया जाता है. इसके बाद दुकानदारों पर जबरन मोबाइल या सिस्टम पर डिजिटल ”रिसीव” करने का दबाव बनाया जाता है.

महीने के अंत तक नहीं पहुंचता राशन, मई का कोटा अब तक गायब

पिछले लगभग एक वर्ष से बर्मामाइंस गोदाम से उन्हें और क्षेत्र के अन्य डीलरों को समय पर खाद्यान्न की आपूर्ति नहीं की जा रही है. हर महीने की 20, 22, 26 या 28 तारीख तक या उससे भी अधिक विलंब से सामग्री उपलब्ध करायी जाती है. मई माह के अंत तक भी खाद्यान्न की आपूर्ति नहीं की गयी है. जिससे कार्डधारियों के बीच समय पर राशन का वितरण नहीं हो पा रहा है.
वजन में कटौती और अवैध वसूली का आरोप

शिकायतकर्ता के अनुसार आपूर्ति में वजन की भी भारी हेराफेरी की जा रही है. दुकानदारों को औसतन प्रति क्विंटल 2 किलोग्राम के हिसाब से कम खाद्यान्न दिया जाता है और बोरे का वजन भी अलग से नहीं काटा जाता. इसके अलावा खाद्यान्न ढुलाई के नाम पर दुकानदारों से अवैध वसूली भी की जा रही है. लिखित प्रमाण न होने से डीलर कानूनी शिकायत नहीं कर पा रहे हैं. गोदाम प्रबंधन अपनी कमियों को छिपाने के लिए जून-जुलाई के राशन का अग्रिम मिलान दिखाकर कागजी खानापूर्ति में जुटा है. वहीं आवाज उठाने वाले दुकानदारों को डीलरशिप रद्द करने की धमकियां दी जा रही हैं. डीलर्स ने साकची गोदाम की तर्ज पर पारदर्शी व्यवस्था और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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