
काठमांडू/बीजिंग: नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बुधवार सुबह आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। नेपाल के रसुवा जिले समेत कई इलाकों में अचानक आए तेज जलप्रवाह और भूस्खलन ने सड़कों, पुलों, बस्तियों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार तक उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों क्षेत्रों में 472 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।
इस प्राकृतिक आपदा के बीच सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों को लेकर है। विभिन्न रिपोर्टों में करीब 1,500 लोगों के लापता होने की बात सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में लापता लोगों में 290 भारतीय नागरिक शामिल हैं। हालांकि, राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है।
लापता भारतीयों में बड़ी संख्या उन लोगों की बताई जा रही है जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के सिलसिले में नेपाल के रास्ते तिब्बत जा रहे थे या यात्रा से लौट रहे थे। इनमें तमिलनाडु समेत देश के अलग-अलग राज्यों के पर्यटक और तीर्थयात्री शामिल हैं। कुछ यात्रा समूहों के लोगों से संपर्क नहीं हो पाने के कारण उनके परिजन लगातार जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
नेपाल की ओर से अभी तक मृतकों की राष्ट्रीयता के आधार पर पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि अब तक बरामद शवों में कोई भारतीय नागरिक शामिल है या नहीं। भारतीय नागरिकों के लापता होने की पुष्टि अलग-अलग माध्यमों से हुई है, लेकिन उनकी सुरक्षित वापसी या मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि होने में समय लग सकता है।
बाढ़ से नेपाल का भोटे कोशी-त्रिशूली कॉरिडोर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से राहत एवं बचाव दलों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है। कई लोग तेज पानी और मलबे के बीच फंस गए, जबकि कुछ लोगों के बह जाने की सूचना है। नेपाल पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ा एक समूह बाढ़ की चपेट में आया। यात्रियों को लेकर जा रही दो बसें सैलाब की चपेट में आकर बह गईं। जिसमें 77 तीर्थयात्रियों और तीन कर्मचारियों के भी लापता होने की खबर है।
नेपाल की ओर से अभी तक मृतकों की राष्ट्रीयता के आधार पर पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि अब तक बरामद शवों में कोई भारतीय नागरिक शामिल है या नहीं। भारतीय नागरिकों के लापता होने की पुष्टि अलग-अलग माध्यमों से हुई है, लेकिन उनकी सुरक्षित वापसी या मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि होने में समय लग सकता है।
बाढ़ से नेपाल का भोटे कोशी-त्रिशूली कॉरिडोर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से राहत एवं बचाव दलों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है। कई लोग तेज पानी और मलबे के बीच फंस गए, जबकि कुछ लोगों के बह जाने की सूचना है। नेपाल पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं।
बाढ़ के बाद कई इलाकों में भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया है। सड़क संपर्क टूटने और बिजली तथा अन्य जरूरी सुविधाओं को नुकसान पहुंचने के कारण राहत कार्यों में भी मुश्किलें आ रही हैं। बचाव दल हेलीकॉप्टरों और अन्य माध्यमों से फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?
प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलनों के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटने और उससे जुड़े बड़े पैमाने पर बर्फ एवं चट्टानों के खिसकने से नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा। इसके बाद भोटे कोशी और आसपास की नदी प्रणालियों में अचानक जलप्रवाह बढ़ गया और नीचे के इलाकों में फ्लैश फ्लड की स्थिति पैदा हो गई। तेज बहाव अपने साथ चट्टान, मिट्टी और मलबा लेकर आया, जिससे नदी किनारे बसे इलाकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ।
इस बीच नेपाल में एक और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि एक नई बनी बैरियर झील टूटने की कगार पर पहुंच गई है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इस झील का पानी ओवरफ्लो हो रहा है। ज्यादा पानी आने पर यह कभी भी टूट सकती है।






