
मुंबई: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वतखोरी के मामले में CGST विभाग के एक सुपरिंटेंडेंट और कंसल्टेंट को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान पंकज कुमार (सुपरिंटेंडेंट) और प्रसाद कुमार स्वामी (कंसल्टेंट) के रूप में हुई है। दोनों पर एक रियल एस्टेट डेवलपर से NOC जारी करने और फ्लैट्स का हैंडओवर कराने के एवज में कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है।
CBI के मुताबिक, रिश्वत की पहली किश्त के तौर पर 10 लाख रुपये नकद लिए जा रहे थे। रकम कंसल्टेंट तक पहुंचते ही जांच एजेंसी की टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। दोनों को 11 सितंबर 2026 को सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन की CBI हिरासत में भेज दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, मामले की शुरुआत 9 सितंबर 2026 को दर्ज एक शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता नवी मुंबई में एक निजी रियल एस्टेट डेवलपमेंट कंपनी से जुड़ा है, जो सेक्टर-17, न्यू पनवेल में स्थित दो आवासीय इमारतों के रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है।
इन दोनों इमारतों में कुल 24 फ्लैट्स हैं। इनमें से कुछ फ्लैट्स का मालिकाना हक CGST और सेंट्रल एक्साइज, रायगढ़ कमिश्नरेट के पास बताया गया है। रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए डेवलपर को संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और फ्लैट्स का हैंडओवर जरूरी था।
आरोप है कि इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बदले CGST सुपरिंटेंडेंट पंकज कुमार ने डेवलपर से एक करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की।
जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत को अलग-अलग माध्यमों से लेने की योजना बनाई गई थी। 10 लाख रुपये तत्काल नकद देने को कहा गया। 20 लाख रुपये अधिकारी द्वारा खरीदे जा रहे एक अन्य फ्लैट की डाउन पेमेंट के तौर पर देने की बात सामने आई। 70 लाख रुपये की शेष रकम बाद में DG HRD, CGST, नई दिल्ली के अन्य अधिकारियों के नाम पर देने का कथित दबाव बनाया गया।
CBI ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद मामले में ट्रैप ऑपरेशन की योजना तैयार की।
CBI के अनुसार, ट्रैप के दौरान सुपरिंटेंडेंट पंकज कुमार ने शिकायतकर्ता को कथित तौर पर 10 लाख रुपये की पहली किश्त अपने कंसल्टेंट प्रसाद कुमार स्वामी को सौंपने का निर्देश दिया।
शिकायतकर्ता जब तय योजना के मुताबिक रकम लेकर पहुंचा और कंसल्टेंट ने कथित तौर पर 10 लाख रुपये स्वीकार किए, तभी पहले से तैयार CBI की ट्रैप टीम ने कार्रवाई कर दी। टीम ने दोनों आरोपियों को पकड़ लिया और रिश्वत की रकम भी बरामद की।
दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद CBI अब इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रिश्वतखोरी के इस नेटवर्क में केवल स्थानीय स्तर के अधिकारी शामिल थे या इसके पीछे विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भी भूमिका थी।
खास तौर पर कथित तौर पर 70 लाख रुपये की रकम DG HRD, CGST, नई दिल्ली के अधिकारियों के नाम पर मांगे जाने के दावे की भी जांच की जा रही है।





