
जमशेदपुर:डिमना में बनने वाले प्रस्तावित इंटर-स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) की 13 एकड़ जमीन अब सिर्फ प्रोजेक्ट की फाइल नहीं, बल्कि एक सियासी और जनआंदोलन का अखाड़ा बन चुकी है। नगर निगम की ओर से थमाए गए नोटिस ने इस आग में घी डालने का काम किया, लेकिन जवाब ऐसा मिला कि प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई। जन विकास मंच के मुखिया और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी सौरभ विष्णु ने निगम के आरोपों पर करारा पलटवार करते हुए दो टूक पूछा है—“आखिर आरोप लगाने की हिम्मत किस आधार पर हुई? सबूत सामने लाइए, फिर बात कीजिए!”
कब्जे का खेल या हक की लड़ाई?
नगर निगम के नोटिस पर तीखा रुख अख्तियार करते हुए सौरभ विष्णु ने 13 अक्टूबर 2026 को लिखित जवाब सौंपकर प्रशासन के दावों की हवा निकाल दी। जहां निगम इसे अतिक्रमण की नजर से देख रहा है, वहीं विष्णु का कहना है कि वहां न तो जमीन हड़पी गई है और न ही एक ईंट तोड़ी गई है; वहां सिर्फ जनता के हक के लिए धूप से बचने को कपड़ा तना है और बैनर लहराया है।
उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि कचरे को एक वार्ड से उठाकर दूसरे वार्ड में फेंक देने से समस्या खत्म नहीं होती, सिर्फ ‘कचरे का पिनकोड’ बदलता है। उन्होंने 10 अक्टूबर और फिर 13 अक्टूबर को धालभूम के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को चिट्ठी सौंपकर आर-पार की स्थिति से बचने के लिए त्रिपक्षीय बैठक (जिला प्रशासन, मानगो नगर निगम और डिमना–पारडीह चौक विकास समिति) की मांग रख दी है।
वसुंधरा एस्टेट से डिमना तक जनसैलाब, प्रशासन की नींद उड़ी
इधर नोटिस का दौर चला, उधर जनता सड़कों पर उतर आई। वसुंधरा एस्टेट, डिमना बस्ती और रिपीट कॉलोनी के बाशिंदों ने ऐलान कर दिया है कि यह लड़ाई अब किसी एक नेता की नहीं, बल्कि उनके फेफड़ों और आने वाली पीढ़ी के भविष्य की है।
बाबलू सिंह, बिनोद सिंह, दीपक, संदीप मिश्रा और बप्पी दत्ता समेत दर्जनों मुखर चेहरों ने एक स्वर में बिगुल फूंक दिया है:
“प्रशासन यह न समझे कि वह सौरभ विष्णु को नोटिस देकर चुप करा देगा। यह डिमना के एक-एक नागरिक के स्वास्थ्य और वजूद की लड़ाई है। डंपिंग का गंदा खेल अब नहीं चलेगा!”
अब गेंद प्रशासन के पाले में
कचरे की बदबू से शुरू हुआ यह विवाद अब नोटिस, सबूत और सार्वजनिक बहस के ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जहां से प्रशासन के लिए पीछे हटना आसान नहीं दिख रहा। क्या नगर निगम टेबल पर आकर जनता से बात करेगा, या फिर डिमना की यह चिंगारी शहर की सबसे बड़ी सियासी लपट बनने जा रही है? नजरें अब 13 एकड़ की उसी जमीन पर टिकी हैं।




