
जनप्रतिनिधियों ने डीसी को सौंपा ज्ञापन, बड़े जन आंदोलन की धमकी
जमशेदपुर: जब घर के नलों से पानी की जगह सिर्फ हवा और इंतजार निकलने लगे, तो समझ लीजिए सिस्टम गहरी नींद में है। पूर्वी सिंहभूम के गोविंदपुर इलाके से लेकर 21 पंचायतों तक का नजारा इन दिनों कुछ ऐसा ही है, जहां पिछले 72 घंटों से घरों के बर्तन खाली पड़े हैं और चापाकलों पर कतारें लंबी होती जा रही हैं। करीब दो लाख की ग्रामीण आबादी इस समय बूंद-बूंद पानी के लिए जंग लड़ रही है।
लापरवाही का ‘घूंट’ पीती जनता, सवालों के घेरे में विभाग
समस्या सिर्फ तीन दिनों की प्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि उस सरकारी रवैये की है जो पाइपलाइन में खराबी आते ही हाथ खड़े कर देता है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की कार्यशैली अब सीधे तौर पर कठघरे में है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का सीधा आरोप है कि जब भी फॉल्ट होता है, विभाग मरम्मत के नाम पर सुस्ती की चादर ओढ़ लेता है। न कोई त्वरित बैकअप प्लान, न कोई ठोस मॉनिटरिंग सिस्टम—नतीजा यह कि दो लाख लोग हैंडपंपों की ओर दौड़ने को मजबूर हैं।
‘सरकारी ढर्रे से नहीं चलेगा काम, कमान टाटा को सौंपो’
इस पूरे ड्रामे और अव्यवस्था के बीच मंगलवार को माहौल तब गरमा गया जब पंचायत प्रतिनिधियों का एक बड़ा जत्था जिला परिषद सदस्य डॉ. परितोष सिंह की अगुवाई में सीधे उपायुक्त (DC) की चौखट पर पहुंच गया।
ज्ञापन सौंपते हुए प्रतिनिधिमंडल ने जो मांग रखी, उसने सीधे तौर पर सरकारी व्यवस्था पर अविश्वास की मुहर लगा दी।
मांग साफ है—“अगर लोगों की प्यास बुझानी है, तो गोविंदपुर जलापूर्ति योजना का जिम्मा तत्काल टाटा स्टील यूआईएसएल (Tata Steel UISL) के हवाले किया जाए।” जानकारों का भी मानना है कि पेशेवर प्रबंधन ही इस इलाके को बार-बार के इस जल संकट से निजात दिला सकता है।
अल्टीमेटम: पानी नहीं तो फिर सड़क पर होगा संग्राम
प्रतिनिधिमंडल ने साफ लफ्जों में प्रशासन को चेतावनी दे दी है कि कागजी आश्वासनों का वक्त अब बीत चुका है। यदि तत्काल आपूर्ति बहाल कर स्थायी समाधान की दिशा में कदम नहीं बढ़ाए गए, तो ग्रामीण अब शांत बैठने के मूड में नहीं हैं। आने वाले दिनों में यह जल संकट एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान डॉ. परितोष सिंह, कुसुम पूर्ति, उप प्रमुख शिव हंसदा, राखी सिंह सरदार, रणजीत कुमार, सतवीर सिंह बग्गा समेत भारी संख्या में जनप्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनके तेवर साफ बता रहे थे कि इस बार बात सिर्फ वादों से नहीं बनेगी।




