
नई दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए अलग-अलग राजनीतिक पहचान तय कर दी है। आयोग के ताजा आदेश के बाद अब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट नए नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा, जबकि अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को भी अलग नाम और प्रतीक दिया गया है।
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम आवंटित किया है। इस गुट के लिए ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ को चुनाव चिह्न बनाया गया है। दूसरी ओर, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है और उसके हिस्से में ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आया है।
मूल नाम और सिंबल के इस्तेमाल पर रोक
यह पूरा घटनाक्रम चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले के बाद सामने आया है, जिसमें दोनों गुटों को फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया था। आयोग ने यह व्यवस्था दोनों पक्षों के बीच पार्टी के नाम और पहचान को लेकर चल रहे विवाद के बीच की है।
आयोग के निर्देश के बाद दोनों गुटों को नए नाम और उपलब्ध चुनाव चिह्नों के विकल्प देने को कहा गया था। इसके बाद शुक्रवार को आयोग ने दोनों पक्षों के लिए नई पहचान की घोषणा कर दी।
उपचुनाव से पहले बदली राजनीतिक पहचान
आयोग का यह फैसला पश्चिम बंगाल की आगामी विधानसभा उपचुनाव प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है। नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। दोनों गुट अब इन्हीं नई पहचान के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ेंगे।
आयोग के अनुसार, यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम प्रकृति की है। यानी तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और चुनाव चिह्न पर दोनों पक्षों के बीच चल रहे विवाद का अंतिम निपटारा अभी बाकी है। फिलहाल दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और प्रतीक देकर चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की गई है।
अब मतदाताओं के सामने होंगे दो अलग नाम और सिंबल
नए आदेश के बाद चुनाव मैदान में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की पहचान ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और फुटबॉल खिलाड़ी के रूप में होगी। वहीं अरूप रॉय गुट ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और लिफाफा चुनाव चिह्न के साथ मैदान में रहेगा।
इस तरह चुनाव आयोग ने फिलहाल दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और प्रतीक देकर आगामी चुनावी प्रक्रिया के लिए रास्ता साफ कर दिया है। हालांकि, मूल तृणमूल कांग्रेस के नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार किस गुट का होगा, इस पर फैसला अभी बाकी है।





