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रसोई गैस की किल्लत से गढ़वा पुलिस लाइन का मेस 10 दिनों से बंद, जवानों के भोजन पर संकट

On: March 20, 2026 4:47 PM
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गढ़वा: जिले में एलपीजी गैस की किल्लत अब पुलिस व्यवस्था पर भी असर डालने लगी है। जिला पुलिस लाइन का सामूहिक मेस पिछले करीब 10 दिनों से बंद पड़ा है, जिससे सैकड़ों पुलिसकर्मियों को खाने-पीने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं रिजर्व बल का मेस भी गैस की कमी के चलते बंद होने की कगार पर पहुंच गया है।

पुलिस लाइन में रहने वाले करीब 200 जवानों और उनके परिवारों की रोजमर्रा की व्यवस्था इस मेस पर निर्भर थी। यहां मात्र 60 रुपये में भरपेट भोजन मिल जाता था, जिससे जवानों को काफी राहत रहती थी। लेकिन मेस बंद होने के बाद अब उन्हें बाहर होटलों और ढाबों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां खाना महंगा होने के साथ-साथ संतोषजनक भी नहीं मिल पा रहा है।
जवानों का कहना है कि ड्यूटी के बाद भोजन के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है, जिससे न सिर्फ समय बर्बाद हो रहा है बल्कि खर्च भी बढ़ गया है। कई जवानों ने बताया कि बाहर खाने में दोगुना से ज्यादा खर्च आ रहा है, जो उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन हरकत में आया है। जिला उपायुक्त दिनेश यादव ने एलपीजी वितरकों और संबंधित कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर समस्या का जल्द समाधान करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव, खासकर मिडिल ईस्ट के हालात, के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है।

उपायुक्त ने भरोसा दिलाया है कि स्थिति जल्द सामान्य कर दी जाएगी और पुलिसकर्मियों को राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, हालांकि कुछ समय तक हल्की असुविधा बनी रह सकती है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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