नवनामांकित बच्चों ने सहजता से सीखे बालक-बालिका समानता व व्यक्तित्व निर्माण के सूत्र
पटमदा / जमशेदपुर : स्कूलों की प्रभात फेरी में बच्चे बचपन से ही “लड़का-लड़की एक समान, सबको शिक्षा सबको ज्ञान” के नारे खूब लगाते है, लेकिन समाज में प्रचलित व्यवहार सदियों से लड़के – लड़कियों के बीच असमानता बढ़ाते रहे है। बढ़ती उम्र के बच्चे जेंडर समानता से जुड़े पहलुओं के प्रति संवेदनशील हो सके, इसके लिए राज्य संपोषित+2 उच्च विद्यालय, पटमदा में जेंडर समानता विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला की शुरुआत करते हुए प्रधानाध्यापक डॉ मिथिलेश कुमार ने बताया कि जीवन में सफल होने और अच्छा इंसान बनने के लिए जेंडर की समझ रखना अहम है।

इस वर्ष कक्षा 9वीं में प्रवेश लेने वाले नव नामांकित बच्चे विद्यालय के परिवेश से अच्छी बातें सीख सके, इसके लिए लगातार ज्ञानवर्धक व शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाती है।

सामाजिक संस्था निश्चय फाउंडेशन के संस्थापक तरुण कुमार ने बतौर मुख्य वक्ता बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे समाज में महिला, पुरुष और ट्रांसजेंडर सभी एक साथ रहते है, हमें सभी का सम्मान करना चाहिए, हम अपने व्यवहार या नासमझी से किसी के भावनाओं को ठेस ना पहुंचाये, इसके लिए हमें जेंडर की बेहतर समझ विकसित करनी चाहिए। हमारी बायलॉजिकल पहचान और सामाजिक जेंडर पहचान अलग-अलग भी हो सकती है। इन जटिल बातों को बच्चों ने लड़कों के काम, लड़कियों के काम समूह कार्य का अभ्यास कर समझने की कोशिश की। अभ्यास के दौरान देखा गया कि समाज के अनुसार लड़कों के कार्य समझे जाने वाले ज्यादातर कार्य लड़कियां भी बखूबी कर पाती है, जबकि लड़कियों के कार्य समझे जाने वाले ज्यादातर कार्य लड़कों के द्वारा नहीं किए जाते। यह पितृसत्तात्मक समाज में व्याप्त जेंडर असमानता को अनायास ही दर्शा जाता है।

कार्यशाला का समापन विद्यालय के समीप स्थित पटमदा बस्ती गांव के दौरे व ग्रामीणों के साथ चर्चा सत्र के साथ हुआ।

मौके पर जेंडर कार्यकर्ता सोमाय लोहार, प्रधानाध्यापक डॉ मिथिलेश कुमार, शिक्षिका अनीता मुर्मू व कक्षा 9वीं के नव नामांकित लगभग 100 बच्चे मुख्य रूप से उपस्थित थे। बताते चले कि समाज में जेंडर समानता को बढ़ावा देने हेतु मिक्स जेंडर क्रिकेट का आयोजन भी विद्यालय में किया जाता है, जिससे बच्चे सहज ही जेंडर से जुड़े जटिल बातों को समझ पाते है।








