
श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए बने भवन को पुजारी से कराया खाली, आदेश के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई
श्री बंशीधर नगर(गढ़वा)। राजा पहाड़ी शिव मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए बनाए गए सरकारी भवन को मंगलवार को प्रशासन ने अतिक्रमण मुक्त करा दिया। एसडीओ प्रभाकर मिर्धा के निर्देश पर सीओ विकास कुमार सिंह एवं बीडीओ रौशन कुमार को मजिस्ट्रेट के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया था। दोनों अधिकारी पुलिस बल के साथ मंदिर परिसर पहुंचे और निर्धारित प्रक्रिया के तहत भवन खाली कराने की कार्रवाई की।
प्रशासनिक टीम ने सरकारी भवन में सपरिवार रह रहे पुजारी गोपाल पाठक को भवन से बाहर कराया। इसके बाद भवन को पूरी तरह खाली कराकर प्रशासन ने उसमें ताला लगा दिया। कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हुई और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई।
मजिस्ट्रेट सह सीओ विकास कुमार सिंह ने बताया कि एसडीओ की ओर से तीन जुलाई को जारी आदेश के आलोक में एक सप्ताह के भीतर भवन खाली कराने का निर्देश दिया गया था। इससे पहले 25 जून को भी गोपाल पाठक को नोटिस जारी कर तीन दिनों के अंदर भवन खाली करने का निर्देश दिया गया था। निर्धारित अवधि में भवन खाली नहीं किए जाने के बाद प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी।
उन्होंने बताया कि उक्त सरकारी भवन का निर्माण विशेष रूप से राजा पहाड़ी शिव मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधा के लिए किया गया है। भवन को अतिक्रमण मुक्त कर अब श्रद्धालुओं के उपयोग के लिए सुरक्षित रखा गया है।
श्रावणी मेले से पहले कार्रवाई
राजा पहाड़ी शिव मंदिर में श्रावण माह के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन की इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भवन खाली होने के बाद श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराने में सहूलियत होगी। मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से भी श्रावणी मेले की तैयारियों को लेकर व्यवस्था दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है।
मौके पर नगर पंचायत के नगर प्रबंधक प्रमेय मंडिलवार, राजा पहाड़ी शिव मंदिर प्रबंधन समिति के सह-उपाध्यक्ष रजनीकांत मधुर उर्फ भोलू, कोषाध्यक्ष शुभम प्रकाश, सह कोषाध्यक्ष मनोज कुमार, उपसचिव लव कुमार, सदस्य कमलेश मेहता, विद्या भास्कर, वीरेंद्र कुमार अग्रहरि, धीरज कुमार, सचिन कुमार तथा पुलिस पदाधिकारी जितेंद्र कुमार, अमित प्रशांत समेत पुलिस जवान मौजूद थे।




